पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी 2022 में अपनी प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट स्टेट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स में पिछले साल की राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल पर चिंता व्यक्त की है और बताया कि दोनों ही परिस्थितियों का मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ पूर्व में श्रीलंका की सेना से युद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंकाई नौसेना ने मानवाधिकारों का पालन इस दौरान नहीं किया था। इसलिए अमेरिका अब कार्रवाई के लिए बाध्य हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) का 52 वां सत्र संपन्न हो गया है। इस दौरान यूएनएचआरसी ने कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य सहित मुद्दों पर 43 प्रस्तावों को अपनाया। साथ ही भोजन के अधिकार को बढ़ावा देने पर प्रमुख फोकस किया। इसके बाद यूएनएचआरसी ने अपना 52वां सत्र समाप्त कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र ने रूस पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुतारेस ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने दुनिया में ‘‘मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन’’ किया है।
Human Rights: दुनिया में कई लोग मानवाधिकारों के उल्लंघन की परेशानी से जूझ रहे हैं। आज इस खबर के माध्यम से हम आपको दुनिया के किन-किन देशों में मानवाधिकारों का उल्लंघन चरम पर है, जहां लोगों जिंदगी खौफ के साए में बीत रही है।
Iran Again Hanged 3 Protesters: ईरान में खुले आम मानवता का गला घोटा जा रहा है और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं भी चुप्पी साधे हैं। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को ईरान लगातार मौत के घाट उतार रहा है। ताजा मामले में ईरान की सरकार ने फिर 3 प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मॉक ड्रिल के दौरान अगर बचाव कर्मी समय पर पहुंच जाते तो बिनु सोमन की जान बचाई जा सकती थी।
अमेरिका और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से तल्खी का दौर जारी है और इसमें सुधार होने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
Nobel Peace Prize for Human Rights Organization of Ukraine: बेलारूस, रूस और यूक्रेन के नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं ने शनिवार हुए पुरस्कार समारोह में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तीखी आलोचना की।
Guterres Spoke on Unrest in Ethiopia:संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इथियोपिया में लड़ रहे पक्षों से शांति समझौते को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। उनके प्रवक्ता ने यह जानकारी दी है।
तारीख 11 दिसंबर साल 1992 को बच्चों के लिए सबसे अहम दिन माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन भारत ने बच्चों के अधिकारों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकारों के कानूनों को अपना समर्थन देते हुए स्वीकार किया था। इसी के अनुच्छेद 54 तहत बच्चों को कुल 41 विशिष्ट अधिकार दिए गए हैं।
India lambasts Pakistan at UNHRC on J&K issue:जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान परेशान और बेबस है। वह बार-बार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर भारत पर दबाव बनाने का असफल प्रयास कर रहा है।
Gujarat News: गुजरात में पथराव करने के आरोपी कुछ मुस्लिम व्यक्तियों की पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से बेंत से की गई पिटाई के कारण उपजे विवाद के बीच राज्य मंत्री हर्ष सांघवी का बयान सामने आया है।
China and Russia Human Rights:विशेषकर पश्चिमी देश संयुक्त राष्ट्र के मुख्य मानवाधिकार निकाय में दो बड़ी विश्व शक्तियों-चीन और रूस के मानवाधिकार रिकॉर्ड की पड़ताल को लेकर दोहरी चुनौतियों से गुजर रहे हैं।
Human rights violation in Ukraine war: रूस और यूक्रेन के बीच करीब सात महीनों से चल रहे भीषण युद्ध के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ क्या-क्या जुल्म हुए हैं, इस बारे में जानकर आपका कलेजा फट जाएगा, दिमाग सन्न रह जाएगा और रगों का खून खौल उठेगा।
China United Nations: चीन संयुक्त राष्ट्र में उन देशों के समर्थन की उम्मीद कर रहा है, जिनसे उसकी दोस्ती है और जिनमें से कई को उसने वित्तीय मदद दी है जबकि अमेरिका नीति गुट जिसमें जी-7 शामिल हैं, लगातार चीन के प्रति मुखर हो रहे हैं।
UN Report on Human: क्या आज के दौर में भी कुछ लोगों को गुलामी में जीना पड़ रहा है, क्या अभी भी गुलाम बनाने वाली प्रथा दुनिया से खत्म नहीं हुई है, क्या लोगों को अपना गुलाम समझने और बनाने वालों में कानून का कोई डर नहीं रह गया है.... अगर आप पूछेंगे तो इसका जवाब हां में है।
इमरान खान इन दिनों अपने सियासी करियर के सबसे बड़े संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं।
Taliban News: तालिबान के अफगानिस्तान में एक साल पूरे होने पर ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि तालिबान ने एक साल पहले अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से मानवाधिकारों और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने के सारे वादे तोड़े हैं।
सरकार ने लोगों से घर खाली कराना शुरू कर गिया है। इसके लिए नकली दस्तावेजों और जोर जबरदस्ती का सहारा लिया जा रहा है। ऐसा करते हुए चीन के नियमों तक का पालन नहीं हो रहा है।
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