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बागपत में अनूठी मन्नत: चार महीने के रोहित को सिक्कों से तौलकर मंदिर में किया दान, तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Feb 01, 2026 11:42 pm IST,  Updated : Feb 01, 2026 11:42 pm IST

यह खबर आस्था और पारिवारिक प्रेम का एक दुर्लभ संगम है। यहाँ बेटे के जन्म पर पिता ने न सिर्फ अपनी मन्नत पूरी की, बल्कि मृतक भाई की याद को भी हमेशा के लिए जिंदा कर दिया। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है।

मासूम का तुला दान- India TV Hindi
मासूम का तुला दान Image Source : REPORTER INPUT

बागपत: बागपत जनपद के छपरौली कस्बे में आस्था  श्रद्धाऔर रिश्तों की गहराई को छू लेने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। यहाँ एक पिता ने न केवल अपने बेटे के जन्म की मन्नत पूरी की, बल्कि अपने दिवंगत भाई की यादों को भी एक नया जीवन दिया। इस घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी है। वहीं इसका एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

रविदास मंदिर में मांगी थी मन्नत

छपरौली कस्बे के पट्टी धंधान निवासी अक्षय उर्फ टिंकू और उनकी पत्नी सोनम ने संतान प्राप्ति की मन्नत संत शिरोमणि रविदास मंदिर में मांगी थी। संकल्प लिया गया था कि यदि पुत्र जन्म लेगा, तो उसके वजन के बराबर राशि मंदिर निर्माण में दान की जाएगी। रविवार को मन्नत पूरी होने के बाद अक्षय अपने चार माह के बेटे को लेकर मंदिर पहुंचे। 

मंदिर परिसर में मासूम को तौला गया

मंदिर परिसर में फूलों से सजा तराजू लगाया गया। एक पलड़े पर मासूम को बैठाया गया, तो दूसरे पलड़े में दस-दस रुपये के सिक्के रखे जाने लगे। जैसे-जैसे सिक्कों की खनक बढ़ी, वैसे-वैसे लोगों की भीड़ और भावनाएं भी उमड़ती चली गईं। तौल पूरी होने पर बच्चे का वजन करीब छह किलो निकला और लगभग दस हजार रुपये मंदिर को दान किए गए। लेकिन इस खबर की सबसे भावुक कड़ी इससे जुड़ी है। 

भाई की मौत के ठीक एक साल बाद हुआ जन्म

अक्षय के छोटे भाई रोहित की पिछले साल छह अक्टूबर को लिवर की बीमारी से मौत हो गई थी। उसी दिन, ठीक एक साल बाद, अक्षय के घर बेटे का जन्म हुआ। तारीख वही… लेकिन इस बार मातम नहीं, खुशियां थीं। अक्षय ने अपने बेटे का नाम भी अपने दिवंगत भाई के नाम पर ही — रोहित — रखा। उनका कहना है कि यह सिर्फ नाम नहीं, बल्कि भाई की याद, उसका प्यार और उसकी अधूरी जिंदगी की एक झलक है। 

एक परिवार की भावनात्मक जीत 

मंदिर में मौजूद लोगों ने बताया कि तुला दान की यह परंपरा आस्था और दान की भावना को मजबूत करती है। लेकिन यहां यह सिर्फ धार्मिक कर्म नहीं था — यह एक भाई का प्रेम, एक पिता का विश्वास और एक परिवार की भावनात्मक जीत थी। छपरौली में अब यह घटना सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि रिश्तों की अमर कहानी बन चुकी है। तुला दान के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब अक्षय ने बताया कि यह मन्नत सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने भाई के प्रति उनके अटूट प्रेम का प्रतीक है। 

रिपोर्ट- पारस जैन, बागपत

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