Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे इन दिनों हर क्षेत्र में ऐसा अद्भुत कार्य कर रहा है जिसे लेकर भारत के रेल नेटवर्क की चर्चा विदेशों में भी है। भारतीय रेलवे की कार्यकुशलता का लोहा दुनिया के कई देश मानते हैं और भारतीय रेलवे से प्रेरणा लेकर ही अपने यहां के रेल नेटवर्क में आमूल—चूल सुधार करते हैं। यही नहीं भारतीय रेलवे अपने मिडिल क्लास यात्रियों को उनकी सुविधा के हिसाब से और उनके बजट में टिकट भी उपलब्ध कराता है। संक्षेप में कहें तो भारत में अगर किसी को वंदे भारत और तेजस जैसी ट्रेनों का संचालन ही दिखता है तो गौर करें कि भारत में कई पैसेंजर और ऐसी एक्सप्रेस ट्रेनें भी हैं जिनका किराया अपेक्षाकृत काफी कम है। बजट की बात हुई है तो आपको बता दें कि, भारतीय रेलवे ट्रेनों की बोगियों भी अच्छी खासी मोटी रकम खर्च करता है जो कि उसे बनाने में व्यय होती है। क्या आपको पता है कि ट्रेन की एक बोगी कितने रुपये में बनती है ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में भी बता देते हैं। इसके पहले हम आपको रेलवे द्वारा किए गए हालिया अभूतपूर्व कार्यों के बारे में भी बताएंगे
आधुनिक जनरल कोचों का रिकॉर्ड उत्पादन
PIB के मुताबिक, भारतीय रेलवे ने आधुनिक यात्री-अनुकूल सुविधाओं से लैस जनरल और गैर-एसी कोचों का रिकॉर्ड उत्पादन किया है ताकि बढ़ती मांग को किफायती किराए पर पूरा किया जा सके। ये कोच यात्रा को आरामदायक बनाते हुए यात्री क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करते हैं, जिससे समावेशी और सुलभ रेल यात्रा के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता और मजबूत होती है। इसी आधार पर, भारतीय रेलवे ने अपने यात्री बेड़े को और मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए चालू और अगले वित्तीय वर्ष के लिए एक सतत कोच उत्पादन कार्यक्रम शुरू किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादन योजना में 4,838 नए एलएचबी जीएस और नॉन एसी कोच (एलएस कोच- 2817, एलएससीएन कोच- 2021) का प्रावधान है। 2026-27 के लिए, उत्पादन लक्ष्य 4,802 एलएचबी कोच (एलएस कोच- 2638, एलएससीएन कोच- 2164) है।

अमृत भारत और नमो भारत ट्रेनों की शुरुआत
अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें, जिनमें स्लीपर और जनरल क्लास कोच सहित सभी प्रकार के नॉन-एसी कोच उपलब्ध हैं, किफायती किराए पर उच्च गुणवत्ता वाली यात्रा प्रदान कर रही हैं। 2025 के दौरान, 13 अमृत भारत ट्रेनें शुरू की गईं, जिससे कुल परिचालन सेवाओं की संख्या 30 हो गई। इसके अतिरिक्त, भुज-अहमदाबाद और जयनगर-पटना के बीच दो नमो भारत रैपिड रेल सेवाएं भी चल रही हैं, जिससे उच्च आवृत्ति वाली क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिल रही है।
प्रमुख स्टेशनों पर वेटिंग एरिया का विकास
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा केंद्र के सफल कार्यान्वयन के बाद भारतीय रेलवे ने देश भर में 76 स्टेशनों को यात्री प्रतीक्षा क्षेत्रों के विकास के लिए चिह्नित किया है। चार महीनों में बनकर तैयार हुए नई दिल्ली के प्रतीक्षा क्षेत्र में लगभग 7,000 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है और इसमें शौचालय, टिकट काउंटर, स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीन और मुफ्त आरओ पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नए प्रतीक्षा क्षेत्रों का डिजाइन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मॉड्यूलर होगा और इन्हें 2026 के त्योहारी सीजन से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे की एक बोगी कितने में बनती है
आपने देखा ही होगा कि, ट्रेन में मुख्य तौर पर तीन तरह के कोच होते हैं- जनरल कोच, स्लीपर कोच और एसी कोच। रेल के कोच स्टील और एल्युमीनियम दोनों से बनते हैं।

इसमें बाहरी हिस्सा स्टील से जबकि अंदरूनी हिस्सा एल्युमीनियम से बनता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एसी कोच की लागत 2.8 से 3 करोड़ रुपये के बीच, स्लीपर कोच की कॉस्ट करीब 1.25 करोड़ रुपये और जनरल कोच की लागत करीब एक करोड़ रुपये तक आती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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