Friday, January 09, 2026
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सऊदी अरब और UAE के बीच और बिगड़े संबंध, जानें क्यों सऊदी सेना के बयान से मचा है हड़कंप

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है। सऊदी अरब ने संयुक्त अरब अमीरात पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सऊदी ने क्या है चलिए जानते हैं।

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927
Published : Jan 08, 2026 01:16 pm IST, Updated : Jan 08, 2026 01:16 pm IST
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (R) UAE के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (L)- India TV Hindi
Image Source : AP सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (R) UAE के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (L)

दुबई: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। सऊदी अरब ने गुरुवार को आरोप लगाया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने यमन के एक अलगाववादी नेता को, जिस पर देशद्रोह का आरोप है, देश से बाहर अबू धाबी भेज दिया है। सऊदी के इस दावे पर UAE की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। फिलहाल, इस नए घटनाक्रम के बाद अरब प्रायद्वीप में पड़ोसी देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

सऊदी अरब की सेना ने किया दावा

सऊदी अरब की सेना के एक बयान में दावा किया गया है कि सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के नेता ऐदारौस अल-जुबैदी यमन से नौका के जरिए सोमालिया भाग गए। बयान में कहा गया है कि इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारी अल-जुबैदी को अमीरात की राजधानी अबू धाबी ले गए।

UAE के मेजर जनरल ने की मदद

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की के बयान में उस शख्स का नाम भी उजागर किया है जिसने अल-जुबैदी को भागना में मदद की थी। यह शख्स को UAE का एक मेजर जनरल बताया गया है। बयान में बताया गया है कि इस ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया इल्यूशिन Il-76 विमान इथियोपिया, लीबिया और सोमालिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में इस्तेमाल किया गया था।

टेलीफोन कॉल को किया गया इंटरसेप्ट

सऊदी अरब के बयान को सऊदी ब्रॉडकास्टरों और अखबारों में प्राथमिकता दी गई। सऊदी के स्वामित्व वाले सैटेलाइट समाचार चैनल अल अरबिया ने कथित तौर पर इंटरसेप्ट की गई टेलीफोन कॉल प्रसारित की हैं जिसमें अल-ज़ुबैदी के भागने की बातें की गई हैं। सऊदी अरब के अंग्रेजी अखबार, अरब न्यूज ने अल-ज़ुबैदी की एक फ्रंट-पेज तस्वीर 'वांटेड' शीर्षक के साथ प्रकाशित की है। 

सरकारी अखबार के संपादकीय में क्या कहा गया?

सरकारी अखबार के पहले पन्ने पर छपे एक तीखे संपादकीय में कहा गया कि अलगाववादी नेता का किंगडम में आने से इनकार करना "उसे अपने देश के गद्दार के तौर पर उसकी छवि को पक्का कर रहा है।" संपादकीय में कहा गया, "अल-ज़ुबैदी ने अपने देश की कीमत पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर अपने छोटे से स्वार्थ को चुना और जबरदस्ती दक्षिणी अलगाव थोपने की कोशिश की, उसका एकमात्र मकसद खुद के लिए सत्ता हथियाना था।"

यमन में कितने लोगों की हुई मौत?

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, यमन में जारी जंग के चलते 150,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें लड़ाके और आम नागरिक शामिल हैं। इसने दुनिया की सबसे खराब मानवीय आपदाओं में से एक को जन्म दिया है। हूती विद्रोहियों ने गाजा पट्टी में इजरायल-हमास युद्ध को लेकर शिपिंग पर भी हमले किए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार के एक अहम मार्ग में बाधा आई है।

गंभीर होंगे हालात

वैसे देखा जाए तो यह नवीनतम आरोप सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंधों में और तनाव पैदा करेगा, जो OPEC सदस्य और पड़ोसी हैं। दोनों देश आर्थिक मुद्दों और क्षेत्रीय राजनीति, खासकर लाल सागर क्षेत्र में, तेजी से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यमन विवाद दशकों में उनका सबसे गंभीर टकराव बन गया है।

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