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एग्जिट पोल देखकर ईवीएम के खिलाफ हल्लाबोल की तैयारी, चुनाव आयोग के दर पर पहुंचेंगे 21 विपक्षी दल

अब सवाल ये है कि चंद्रबाबू नायडू ही क्यों दौड़ रहे हैं, कोई और क्यों नहीं? ना तो आंध्र प्रदेश में लोकसभा की सीट ज्यादा है और ना ही एग्जिट पोल बता रहा है कि आंध्र प्रदेश में नायडू की कोई लहर या सुनामी है।

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : May 21, 2019 09:03 am IST, Updated : May 21, 2019 09:03 am IST
एग्जिट पोल देखकर ईवीएम के खिलाफ हल्लाबोल की तैयारी- India TV Hindi
एग्जिट पोल देखकर ईवीएम के खिलाफ हल्लाबोल की तैयारी

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम कुछ दिन बाद आएंगे लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों का असर ये हुआ कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दिल्ली से कोलकाता, लखनऊ से मुंबई कर रहे हैं और ईवीएम पर सवाल उठ रहे हैं। ईवीएम पर आज एक बार फिर 21 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के दरवाजे पर पहुंचने वाली है। वैसे तो रिजल्ट 23 मई को आने वाला है लेकिन एग्जिट पोल देखकर ही ईवीएम के खिलाफ हल्लाबोल की तैयारी शुरू हो गई है।

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अब सवाल ये है कि चंद्रबाबू नायडू ही क्यों दौड़ रहे हैं, कोई और क्यों नहीं? ना तो आंध्र प्रदेश में लोकसभा की सीट ज्यादा है और ना ही एग्जिट पोल बता रहा है कि आंध्र प्रदेश में नायडू की कोई लहर या सुनामी है। आंध्र प्रदेश को लेकर इंडिया टीवी-CNX के एग्जिट पोल में पच्चीस सीटों में से सिर्फ सात सीट टीडीपी को मिलता बताया गया है जबकि जगन मोहन रेड्डी की पार्टी को 18 सीट।

इसी तरह दूसरे चैनल्स के एग्जिट पोल्स ने भी नायडू की पार्टी को चार से लेकर 12 सीट तक ही दिया है जिसमें सबसे ज्यादा न्यूज 18 इंडिया इप्सोस ने दस से 12 सीटों का अनुमान जताया है और इन सभी एग्जिट पोल्स का अगर औसत निकालें तो चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को सात सीटों से ज्यादा मिलती नहीं दिख रही है।

यही वजह है कि बीजेपी चंद्रबाबू नायडू के इस भारत भ्रमण पर चुटकी भी ले रही है, कह रही है कि नायडू चुनाव बाद अपनी नौकरी तलाश रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर नायडू भारत भ्रमण क्यों कर रहे हैं? क्या सिंगल डिजिट में सीट लेकर वो मोदी-विरोधी विपक्ष का नेतृत्व करने की सोच रहे हैं और क्या इस हैसियत में बाकी विरोधी पार्टियां उन्हें अपना नेता मानने को तैयार होंगी?

खबर ये है कि चंद्रबाबू नायडू यूं ही डोर टू डोर कैंपेन नहीं कर रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि वो विपक्ष के नेताओं को ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर किसी सूरत में बीजेपी बहुमत से दूर रहती है तो विपक्ष का एजेंडा क्या होगा, किस आधार और नीतियों पर विरोधियों को एकजुट किया जाएगा। कैसे विरोधी दलों को बीजेपी को सपोर्ट करने से रोकने की कोशिश होगी और विरोधी दल के नेताओं को रोकने वाला नेता कौन होगा।

चंद्रबाबू नायडू इन सियासी मुलाकातों के बीच आज विपक्ष के कई नेता दोपहर 3 बजे चुनाव आयोग से मुलाकात करने वाले हैं। बड़ा सवाल यही है विपक्ष की ओर से कौन-कौन इस मुलाकात में शामिल होगा। एग्जिट पोल आते ही ईवीएम पर भड़ास तो सबने निकाल दी लेकिन ईवीएम को लेकर एजेंडा क्या होगा इस पर फिलहाल सन्नाटा है।

एग्जिट पोल आते ही ममता बनर्जी ने कह दिया कि हजारों ईवीएम में हेरफेर करने या बदलने की साजिश है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने कह दिया सारा खेल ईवीएम का ही है। ईवीएम पर सवाल तो सब उठा रहे हैं लेकिन इंतजार नतीजे का कर रहे हैं क्योंकि यूपी का महागठबंधन हो या फिर बंगाल की दीदी, एग्जिट पोल ने उनके कदमों के नीचे से जमीन खींच ली है। अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही हुए तो ये विपक्ष की हार सिर्फ सीटों से नहीं होगी, सियासत से भी होगी।

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