Brain Tumor Day 2023: आज ब्रेन ट्यूमर डे है और हर साल इस दिन को इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। ब्रेन ट्यूमर (brain tumor in hindi) एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जिसकी शरुआत में दिखने वाले लक्षण पकड़ में नहीं आते और बीमारी बढ़ती जाती है। तो, सवाल उठता है कि इस बीमारी की शुरुआत कैसे होती, कैसे इसके लक्षणों को पहचानें और इसका इलाज क्या है? जानते हैं इन तमाम चीजों के बारे में अलग-अलग मेडिकल एक्सपर्ट है।
नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, डॉक्टर रजत चोपड़ा बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन, किसी के परिवार में पहले से ब्रेन ट्यूमर का इतिहास है तो उन्हें यह बीमारी होने की संभावना ज्यादा होती है। इस बीमारी में मस्तिष्क में कोशिकाओं और ऊतकों की गांठ बन जाती है और ये इक्ट्ठा होकर ट्यूमर का रूप ले लेती है। ऐसे में ब्रेन ट्यूमर के लक्षण पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी है क्योंकि अधिकतर समस्याएं इसी लापरवाही के चलते बढ़ती हैं और देरी होने पर सफल उपचार भी नहीं मिल पाता।
डॉक्टर प्रशांत कुमार चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, बताते हैं कि किसी भी प्रकार की गांठ जो हमारे मस्तिष्क के अंदर बनती है या कहीं और से वहां पहुंचती है, जिसकी वजह से हमारे नॉर्मल ब्रेन सेल्स डैमेज होते हैं यही ब्रेन ट्यूमर का एक रूप है। ऐसे में आपको कभी भी इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे कि
लोगों में सिर दर्द तो होता है पर वह ठीक हो जाता है। लेकिन, ये लगातार बना रहता है और दवाइयां लेने के बाद भी नहीं थमता और चक्कर आना व उल्टियां आदि समस्याएं भी हो रही हैं तो ये ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं।
बैठे-बैठे या चलते-चलते बेहोश हो जाना ब्रेम ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। आपको इस लक्षण कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
ब्रेन ट्यूमर का एक लक्षण ये भी है कि शरीर का कोई भी अंग अचानक से पैरालाइज हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर के पास जाएं और तुरंत इसकी जांच करवाएं क्योंकि ये बहुत ज्यादा गंभीर है।
अगर आप चश्मा लगा रहे हैं और आपकी आंखें ज्यादा खराब नहीं हैं और अचानक से आपको लगने लगे कि आंखों की रोशनी कम हो रही है तो ये ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों में से एक हो सकता है।
अगर किसी को बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं खासकर, सामान्य व्यक्ति जिन्हें पहले किसी भी प्रकार की समस्या ना हो तो तुरंत जांच करवाएं। क्योंकि ये ब्रेन की इस गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

ब्रेन ट्यूमर के इलाज के प्रकारों पर बात करते हुए डॉक्टर पूजा खुल्लर, सीनियर कंसल्टेंट –रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली बताती हैं कि इसका इलाज मरीज की स्थिति और ट्यूमर के आकार पर निर्भर करता है। डॉक्टर पहले जांच करते हैं जैसे
-सिर के असामान्य क्षेत्रों के सीटी स्कैन,
-एमआरआई- एमआरआई
-बायोप्सी
-एंजियोग्राफी
-स्पाइनल टैपिंग
-न्यूरोलॉजिकल जांच जैसे मांसपेशियों की ताकत, सुनने और देखने की क्षमता तो जांच।
तब, इन आधारों पर सर्जरी का विकल्प अपनाया जाता है। सर्जरी में यह भी देखा जाता है कि इसमें पूरा ट्यूमर निकाला जाएगा या आधा। यह अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। इससे इन्फेक्शन या ब्लीडिंग की समस्या भी हो सकती है। इसमें रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और दवाओं से इलाज किया जा सकता है।
डॉक्टर पूजा खुल्लर ब्रेन ट्यूमर के इलाज के बाद भी यह कैंसर दोबारा लौट सकता है और इसलिए इसके लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवाइयां देते हैं। इसमें दौरा पड़ने पर एंटीसीजर दवाई भी दी जाती है, यह दवाएं ब्रेन ट्यूमर के कारण आई सूजन को कम करने में भी मदद करते हैं।
कैंसर के साइड इफेक्ट को कम करने के लिए पैलिएटिव केयर की मदद ली जाती है इसके माध्यम से इलाज करा रहे व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक तौर पर काफी राहत मिलती है। इसमें दवाएं, पोषण और आराम के तरीके अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को सही करने का प्रयास किया जाता है।
संपादक की पसंद