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देहरादून: गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग और मारपीट, बेल्टों से पीटा गया

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jan 18, 2026 09:16 am IST,  Updated : Jan 18, 2026 09:25 am IST

देहरादून के गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों के साथ मारपीट की बात सामने आई है। इस घटना में जूनियर छात्रों को बेल्टों से पीटा गया है।

Government Doon Medical College- India TV Hindi
गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज Image Source : GDMCUK/WEBSITE

देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज (पटेल नगर, देहरादून) में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग और मारपीट की घटना सामने आई है। आरोप है कि जूनियर्स को बेल्टों से पीटा गया है।

सामने आया मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल का बयान

मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर गीता जैन का इस मामले को लेकर बयान भी सामने आया है। उन्होंने बताया कि एंटी-रैगिंग कमेटी इस घटना की विस्तार से जांच कर रही है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डिसिप्लिन कमेटी ने छात्रों के बयान दर्ज किए हैं और कहा है कि कॉलेज में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि अगर छात्रों पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें कॉलेज से सस्पेंड करना भी शामिल हो सकता है।

रैगिंग कितना बड़ा अपराध?

पहले स्कूल-कॉलेजों में रैगिंग को हल्के मजाक के तौर पर लिया जाता था, जिसमें सीनियर्स द्वारा जूनियर्स से कुछ टास्क पूरे करवाए जाते थे, जो मजेदार भी होते थे और सीनियर्स-जूनियर्स के बीच दोस्ती का कारण बनते थे। लेकिन समय के साथ रैगिंग का स्वरूप बदल गया और सीनियर्स द्वारा जूनियर्स को टॉर्चर किया जाने लगा। हद तो तब हो गई, जब रैगिंग की वजह से कुछ बच्चों ने सुसाइड कर ली तो कुछ को सीनियर्स ने ही मार डाला। इस तरह के तमाम मामले पहले देखे और सुने गए। 

इसके बाद भारत में रैगिंग को कॉलेज का मजाक नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध माना गया। सुप्रीम कोर्ट, UGC और विभिन्न राज्य कानूनों के कारण रैगिंग को लेकर सजा का प्रावधान है और इसकी सजा काफी सख्त है। रैगिंग का आरोप सही पाए जाने पर दोषी को जेल और जुर्माना दोनों को भुगतना पड़ सकता है। इसमें रैगिंग के प्रकार के हिसाब से कोर्ट द्वारा 2 साल तक की कैद से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक की सजा है। 

इसके अलावा यूजीसी भी रैगिंग को लेकर काफी सख्त है और ऐसा होने पर आरोपी के स्थायी रूप से निष्कासन समेत जुर्माना लगाया जा सकता है। 

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