भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए शुरू किए गए केंद्रीय पोर्टल उम्मीद की डेडलाइन पूरी हो चुकी है। अब इस पोर्टल में किसी नई संपत्ति को अपलोड नहीं किया जा सकता है। हालांकि, जो संपत्तियां अपलोड हो चुकी हैं, उनके सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 जून को इस पोर्टल की शुरुआत की थी। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और उम्मीद अधिनियम, 1995 के अनुसार इस पोर्टल के लिए छह महीने की विंडो दी गई थी, जो पूरी हो चुकी है। इसके बाद आधिकारिक तौर पर पोर्टल 6 दिसंबर (शनिवार) को अपलोड के लिए बंद कर दिया गया।
डेडलाइन पास आते ही वक्फ संपत्तियां अपलोड करने में तेजी आई। कई समीक्षा बैठकों, ट्रेनिंग वर्कशॉप और सचिव स्तर तक के उच्च-स्तरीय हस्तक्षेपों ने इस प्रक्रिया में नई गति ला दी, जिससे अंतिम घंटों में अपलोड में तेजी आई।
उम्मीद पोर्टल के आंकड़े
- पोर्टल पर 5,17,040 वक्फ संपत्तियों को शामिल किया गया
- नामित अनुमोदकों द्वारा 2,16,905 संपत्तियों को मंजूरी दी गई
- निर्माताओं द्वारा 2,13,941 संपत्तियां प्रस्तुत की गई हैं और समय सीमा तक प्रक्रियाधीन है
- सत्यापन के दौरान 10,869 संपत्तियां अस्वीकृत कर दी गई
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने कई ट्रेनिंग सेशन कराए
इस व्यापक राष्ट्रीय कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों और अल्पसंख्यक विभागों के साथ निरंतर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। वक्फ बोर्डों और राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को अपलोड करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए दिल्ली में दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर कार्यशाला भी आयोजित की गई।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव ने 20 से ज्यादा बैठकें कीं
राज्यों में वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक टीमों को तैनात किया गया और देश भर में 7 क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की गई। तकनीकी सहायता और अपलोड के दौरान आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंत्रालय के कार्यालय में एक समर्पित हेल्पलाइन भी स्थापित की गई। पोर्टल शुरू होने के बाद से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने 20 से अधिक समीक्षा बैठकें की और मौजूदा वक्फ संपत्तियों के विवरण को समय पर और सटीक रूप से अपलोड करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और निगरानी की। इस चरण का समापन, उम्मीद फ्रेमवर्क के तहत पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता, दक्षता और एकीकृत डिजिटल प्रबंधन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। (इनपुट- पीआईबी)
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