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देशव्यापी जाति आधारित गणना कब से शुरू होगी? गृह मंत्रालय ने दिया ये अपडेट

देश में होने वाली जनगणना को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच गृह मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि जनगणना 2027 के तहत जाति आधारित गणना निश्चित रूप से की जाएगी।

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
Published : Jan 27, 2026 11:44 pm IST, Updated : Jan 27, 2026 11:44 pm IST
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Image Source : PTI लोगों की भीड़

नई दिल्ली: जनगणना 2027 के तहत जाति आधारित गणना भी होगी। गृह मंत्रालय ने आज यह साफ कर दिया कि देश भर में फरवरी 2027 से शुरू होने वाली आबादी की गणना के दूसरे चरण के दौरान जातिवार गणना की जाएगी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में होगी। 

भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे कुछ लोग

पूर्व में जारी एक सरकारी बयान का हवाला देते हुए, गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 के बारे में पूरी जानकारी 12 दिसंबर 2025 को एक प्रेस नोट के माध्यम से बताई जा चुकी है। मंत्रालय ने कहा, "फिर भी, कुछ लोग जनगणना 2027 और विशेष रूप से जातिवार गणना के संबंध में जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जनगणना 2027 दो चरणों में की जाएगी, जिसमें दूसरे चरण में जातिवार गणना की जाएगी।" 

जनगणना 2027 दो चरणों  में होगी

इस नोट में साफ तौर पर कहा गया है कि पिछली जनगणनाओं की तरह जनगणना 2027 भी दो चरणों में की जा रही है - पहले चरण को मकानों की गणना और आवास गणना के रूप में जाना जाता है, और दूसरा चरण आबादी की गणना है। सरकार ने 22 जनवरी को 33 प्रश्नों की लिस्ट जारी की, जो एक अप्रैल से शुरू होने वाले जनगणना के पहले चरण के दौरान नागरिकों से पूछे जाएंगे। 

  1. प्रथम चरण (मकान सूचीकरण और आवास गणना): यह अभियान इस वर्ष 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इसमें मकानों की संरचना और वहां उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा।
  2. द्वितीय चरण (आबादी की गणना): यह मुख्य चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसके दौरान जातिवार आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।

पहले चरण के लिए 33 सवालों पूछे जाएंगे, जिनमें मुख्य सवाल ये हैं

  1. मकान के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री (फर्श, दीवार, छत)।
  2. परिवार में विवाहित जोड़ों की संख्या और घर के मुखिया का विवरण।
  3. उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार।
  4. बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक आवश्यकताओं (वाहनों आदि) तक पहुंच।
  5. संपत्ति का स्वामित्व और परिवार के मुखिया की सामाजिक श्रेणी (SC/ST/अन्य)।

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