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पेड न्यूज मामले में MP के मंत्री की याचिका पर फैसला सुरक्षित

 Written By: IANS
 Published : Jul 05, 2017 12:32 pm IST,  Updated : Jul 05, 2017 12:32 pm IST

भारती के अधिवक्ता प्रतीत बिसौरिया ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते मिश्रा और भारती स्वयं अदालत में उपस्थित हुए, दोनों की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते दोनों ने स्वयं अपना पक्ष रखा। वहीं न्यायाधीश ने दोनों

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ग्वालियर: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पेड न्यूज मामले में तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार के जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की ओर से उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में दायर की गई याचिका पर न्यायाधीश विवेक अग्रवाल की अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। ग्वालियर खंडपीठ के न्यायाधीशों के तबादले के विरोध में अधिवक्ताओं के मंगलवार से शुक्रवार तक हड़ताल पर चले जाने के कारण न्यायाधीश अग्रवाल के सामने मिश्रा ने स्वयं अपना पक्ष रखा। वही प्रतिद्वंद्वी राजेंद्र भारती ने न्यायाधीश से मिश्रा को स्थगन न दिए जाने का अनुरोध किया। ये भी पढ़ें: भारत और चीन में बढ़ी तल्खियां, जानिए किसके पास है कितनी ताकत

भारती के अधिवक्ता प्रतीत बिसौरिया ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते मिश्रा और भारती स्वयं अदालत में उपस्थित हुए, दोनों की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते दोनों ने स्वयं अपना पक्ष रखा। वहीं न्यायाधीश ने दोनों की बात सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।"

ज्ञात हो कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मिश्रा दतिया से निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में पैसे देकर खबर छपवाने और खर्च का सही ब्यौरा न देने का आरोप लगाते हुए उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे राजेंद्र भारती ने चुनाव आयोग में वर्ष 2009 में शिकायत की थी, जिस पर चुनाव आयोग का 24 जून का फैसला आया। आयोग ने आरोपों को सही पाया और मिश्रा को तीन साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया।

आयोग के फैसले के खिलाफ मंत्री मिश्रा उच्च न्यायालय का रुख किया। 30 जून की सुनवाई में चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने जवाब देने के लिए समय की मांग की, जिसे न्यायाधीश विवेक अग्रवाल ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई पांच जुलाई को तय की थी। दूसरी ओर भारती की ओर से केवियट दायर है, जिसमें कहा गया है कि किसी तरह का फैसला लिए जाने से पहले उनका भी पक्ष सुना जाए।

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