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UP News: 20 रुपये के लिए वकील ने लड़ा 22 साल तक मुकदमा, जीत के बाद ब्याज सहित मिली इतनी रकम

UP News: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक वकील ने रेलवे से 20 रुपये के लिए 22 साल से अधिक समय तक लड़ाई लड़कर आखिरकार जीत हासिल कर ली है। अब रेलवे को एक महीने में उन्हें 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाकार पूरी रकम चुकानी होगी।

Edited By: Shashi Rai @km_shashi
Published : Aug 08, 2022 01:12 pm IST, Updated : Aug 08, 2022 01:40 pm IST
Representative image- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Representative image

Highlights

  • 20 रुपये के लिए वकील ने लड़ा 22 साल तक मुकदमा
  • मथुरा के वकील से केस हार गया रेलवे
  • 12% वार्षिक ब्याज के साथ पूरी रकम चुकानी होगी

UP News: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक वकील ने रेलवे से 20 रुपये के लिए 22 साल से अधिक समय तक लड़ाई लड़कर आखिरकार जीत हासिल कर ली है। अब रेलवे को एक महीने में उन्हें 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाकार पूरी रकम चुकानी होगी। साथ ही, आर्थिक व मानसिक पीड़ा एवं वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये जुर्माने के रूप देने का निर्देश भी दिया गया है। जिला उपभोक्ता फोरम ने पांच अगस्त को इस शिकायत का निस्तारण करते हुए अधिवक्ता के पक्ष में फैसला किया। मथुरा के होलीगेट क्षेत्र के निवासी अधिवक्ता तुंगनाथ चतुर्वेदी ने सोमवार को बताया कि 25 दिसंबर 1999 को अपने एक सहयोगी के साथ मुरादाबाद जाने के लिए टिकट लेने वह मथुरा छावनी की टिकट खिड़की पर गए थे। उस समय टिकट 35 रुपये का था। उन्होंने खिड़की पर मौजूद व्यक्ति को 100 रुपये दिए, जिसने दो टिकट के 70 रुपये की बजाए 90 रुपये काट लिए और कहने पर भी उसने शेष 20 रुपये वापस नहीं किए।

कोर्ट ने ये दिया आदेश

चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने यात्रा पूरी करने के बाद 'नॉर्थ ईस्ट रेलवे' (गोरखपुर) तथा 'बुकिंग क्लर्क' के खिलाफ मथुरा छावनी को पक्षकार बनाते हुए जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। 22 साल से अधिक समय बाद पांच अगस्त को इस मामले का निपटारा हुआ। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष नवनीत कुमार ने रेलवे को आदेश दिया कि अधिवक्ता से वसूले गए 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाकर उसे लौटाया जाए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता को हुई मानसिक, आर्थिक पीड़ा एवं वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये बतौर जुर्माना अदा किया जाए।

30 दिन के भीतर चुकाएं रुपये: कोर्ट

उन्होंने यह भी आदेश दिया कि रेलवे द्वारा फैसला सुनाए जाने के दिन से 30 दिन के भीतर यदि धनराशि अदा नहीं की जाती, तो 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 12 की बजाय 15 प्रतिशत ब्याज लगाकर उसे लौटाना होगा। अधिवक्ता तुंगनाथ चतुर्वेदी ने कहा, ''रेलवे के 'बुकिंग क्लर्क' (टिकेट बुक करने वाले कर्मी) ने उस समय 20 रुपये अधिक वसूले थे। उसने हाथ से बना टिकट दिया था, क्योंकि तब कंप्यूटर नहीं थे। 22 से अधिक समय तक संघर्ष करने के बाद आखिरकार जीत हासिल की।''

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