मौजूदा समय में रूस का कच्चा तेल अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूस से तेल आयात दिसंबर के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है।
अब तुर्की, भारत को पीछे छोड़ते हुए रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है, जिसने दिसंबर में रूस से 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे।
21 नवंबर के बाद रूसी तेल का आयात घटकर लगभग 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मासिक आधार पर 5.7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी दर्शाता है।
रूसी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने फिलहाल रूसी तेल का आयात रोक दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर को ल्यूकऑयल के साथ रूस की एक अन्य तेल कंपनी रॉसनेफ्ट पर भी नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। ये दोनों कंपनियां रूस के कुल तेल निर्यात का करीब आधा हिस्सा संभालती हैं।
अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है कि रॉसनेफ्ट और ल्यूकऑयल से जुड़े सभी मौजूदा लेनदेन 21 नवंबर तक समाप्त हो जाने चाहिए।
रूस द्वारा यूराल और अन्य ग्रेड के तेल पर दी गई नई और अधिक छूट (औसतन $3.5 से $5 प्रति बैरल, जो जुलाई-अगस्त की $1.5-$2 छूट से काफी अधिक है) के चलते भारत ने शिपमेंट बढ़ाई।
इस महीने के लिए जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, रूस से कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अगस्त में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50% का दंडात्मक शुल्क लगाया था, ताकि भारत पर दबाव डाला जा सके और वह रूस से कच्चे तेल के आयात को कम करे।
भारत अगर रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करता है तो चालू वित्त वर्ष में देश का खर्च 9 अरब डॉलर बढ़कर 12 अरब डॉलर हो जाएगा।
अमेरिका ने 25 प्रतिशत शुल्क की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन जुर्माने की राशि अभी तक घोषित नहीं की गई है।
भारत कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरी करता है। परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया भारत का मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन पिछले 3 सालों में रूस प्रमुख स्रोत के रूप में उभरकर सामने आया है।
कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता अप्रैल 2025 के दौरान बढ़कर 90% हो गई, जो अप्रैल 2024 में 88.5% थी। भारतीय आयात में देश की बाजार हिस्सेदारी अप्रैल में बढ़कर 40% हो गई, जो एक साल पहले 39% थी।
भारत की कच्चे तेल की मांग 2023 में 54 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) से बढ़कर 2030 तक 67 लाख बीपीडी हो जाने का अनुमान है। यह 3.2 प्रतिशत या 13 लाख बीपीडी की वृद्धि है।
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) दो तरह का होता है। जिसमें एक होता है ब्रेंट क्रूड जो कि लंदन में ट्रेड होता है। दूसरा होता है WTI, जो कि अमेरिका में ट्रेड होता है। भारत जिस कच्चे तेल का आयात किया जाता है, वह ब्रेंट क्रूड है।
क्रूड ऑयल में भारत की घरेलू खपत अभी करीब 50 लाख बैरल प्रति दिन है। आईईए के निदेशक (ऊर्जा बाजार एवं सुरक्षा) किसुके सदामोरी ने कहा, ‘‘त्वरित हरित ऊर्जा कदमों के बावजूद 2030 तक भारत की तेल मांग तीव्र गति से बढ़ेगी। भारत की वृद्धि दर 2027 में चीन से आगे निकल जाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार चीन के बाद भारत का सबसे ज्यादा व्यापार घाटा रूस के साथ है। भारत की कोशिश रही है कि व्यापार के लिए रुपये-रूबल मैकेनिजम का ही इस्तेमाल हो। इस मैकेनिज्म में भारत रूस को भारतीय मुद्रा में भुगतान करेगा और रूस भारत को रुबल में भुगतान करेगा।
भारत की तरह ही पाकिस्तान रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना चाहता है और इसके लिए वह उतावला हुआ जा रहा है। जानिए पूरी खबर-
Crude oil from Russia: भारत आए दिन तेल खरीदने के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। हालांकि इसके पीछे का एक इतिहास भी है। आइए जानते हैं कि दिसंबर और जनवरी महीने में ही हमेंशा तेल का आयात इतना अधिक क्यों बढ़ जाता है?
दिसंबर में उसने भारत को प्रतिदिन 11.9 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति की। इससे पहले नवंबर में रूस से भारत का आयात 9,09,403 बैरल प्रतिदिन था। अक्टूबर, 2022 में यह 9,35,556 बैरल प्रतिदिन था।
सरकार ने अमेरिका के नेतृत्व वाले जी7 समूह की उस योजना में शामिल होने की कोई इच्छा प्रकट नहीं की है जिसमें रूस के राजस्व को सीमित करने के मकसद से उससे खरीदे गये तेल के दाम की सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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