नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद पुलिस एक्शन में है। पुलिस ने इस मामले में बिल्डर अभय कुमार को अरेस्ट किया है जिसकी आज फिर कोर्ट में पेशी होगी।
तीन सदस्यीय SIT हादसे वाली जगह पहुंची हैं और लापरवाही वाले एंगल से पूरी जांच की जा रही है। 5 दिनों के भीतर SIT शासन को रिपोर्ट सौंपेगी।
बिल्डर अभय कुमार रियल एस्टेट कंपनी MZ Wiztown Planners का डायरेक्टर है और वो उन दो बिल्डरों में एक है जिनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
योगी सरकार की सख्त कार्रवाई-
- सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर रियल एस्टेट कंपनियों पर FIR दर्ज
- एम्सड विशटाउन प्रा. लि. और लोटस ग्रीन के खिलाफ मामला दर्ज
- एम्सड विशटाउन परियोजना के मालिक अभय कुमार हिरासत में
- जांच में बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतज़ामों की भारी कमी उजागर
- नोएडा प्राधिकरण का एक जूनियर इंजीनियर निलंबित
- अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
- बिल्डरों और प्लॉट-मालिकों को सुरक्षा मानकों को लेकर नोटिस
बिल्डर की आज फिर कोर्ट में पेशी
इस मामले मे बनी SIT आज नोएडा के कई बड़े अफसरों से पूछताछ कर सकती है। इस बीच वारदात के करीब 70 घंटे बाद NDRF ने इंजीनियर युवराज मेहता की कार को पानी से बाहर निकाल लिया है। इस दौरान कार की विंड स्क्रीन साफ साफ टूटी नजर आ रही है। वहीं, कार का सनरूफ भी खुला हुआ है। सनरूफ खुला होने से साफ है कि युवराज ने इसके जरिए बाहर निकलकर मदद की गुहार लगाई थी। मोबाइल की फ्लैश लाइट दिखाकर खुद को बचाने को कहा था लेकिन 2 घंटे तक रेस्क्यू टीम उस तक नहीं पहुंच पाई।
हेल्पलाइन नंबर जारी
सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली साइटों पर सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन ने व्हाट्सएप/हेल्पलाइन नंबर 92055 59204 जारी किया है। नागरिक खतरनाक स्थानों की फोटो और लोकेशन भेज सकेंगे।
- 24 घंटे के भीतर निरीक्षण और कार्रवाई का आश्वासन
- SDRF, NDRF और दमकल विभाग के साथ समन्वय मजबूत
- सभी राहत-बचाव इकाइयों को विशेष प्रशिक्षण के निर्देश
- आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी रेस्क्यू पर जोर
- प्रशासन की जनता से अपील- असुरक्षित स्थलों की तुरंत सूचना दें
- खुले गड्ढे या टूटी बैरिकेडिंग दिखे तो हेल्पलाइन पर शिकायत करें
- मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि- लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
- दोषियों पर कठोर कार्रवाई और भविष्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित
फिलहाल SIT जांच में जुटी है कि युवराज को बचाने के लिए पूरे दो घंटे थे लेकिन फिर भी उसे क्यों नहीं बचाया जा सका, रेस्क्यू में देरी क्यों हुई, मामले में लापरवाही कहां हुई और किससे हुई। पिछले 6 साल से वो गड्ढा और नाला खुला क्यों रखा गया था। 31 दिसंबर के हादसे के बाद भी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? इन सभी सवालों के जवाब SIT ढूंढने में लगी है।
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