Burj Khalifa Interesting Facts: संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में स्थित बुर्ज खलीफा को दुनिया भर में सबसे ऊंची इमारत के तौर पर जाना जाता है। ये दुबई के आधुनिक इंजीनियरिंग और असीमित महत्वाकांक्षा का प्रतीक है, जहां से शहर के शानदार नजारे दिखते हैं और इसमें दुनिया की सबसे तेज लिफ्टें भी हैं, जो इसे एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बनाती हैं। बुर्ज खलीफा का लग्जरी और लैविश लाइफस्टाइल के चर्चे तो दुनिया भर में मशहूर हैं। मगर इस चमचमाती इमारत का एक काला सच भी है जिसे 100 में से 99 लोग नही जानते होंगे। हालाांकि, आज हम आपको बुर्ज खलीफा का डार्क सीक्रेट बताएंगे जिसे सुनने के बाद आपको वहां होने वाले घिनौने काम और इस इमारत दोनों से नफरत हो जाएगी।
बुर्ज खलीफा का हौव्वा क्यों बना है
बुर्ज खलीफा को देखने के बाद एक बार तो मन में लोगों के ये ख्याल तो आता ही होगा कि आखिर इस इमारत का इतना हौव्वा क्यों बना है ? क्या बुर्ज खलीफा ओवररेटेड है ? तो चलिए आज हम आपको इस फैक्ट से भी रूबरू कराते हैं। सबसे पहले तो आपको बता दें कि,बुर्ज खलीफा मुख्य रूप से 828 मीटर होने के साथ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत होने के लिए प्रसिद्ध है। इसकी 124वीं और 125वीं मंजिल से दुबई के मनोरम 360-डिग्री दृश्य मिलते हैं, जो पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। शाम होते ही रंग-बिरंगी लाइटों में बुर्ज खलीफा की खूबसूरती देखने लायक होती है यही वजह है कि, ये इमारत दुनिया भर के पर्यटक और व्लॉगर्स को आकर्षित करती है। आज की तारीख में बुर्ज खलीफा दुबई के साहसिक और भविष्यवादी दृष्टिकोण का एक वैश्विक प्रतीक बन गया है, जो शहर की असीम आकांक्षाओं को दर्शाता है।
बुर्ज खलीफा के बारे में सोचने वाली बातें
बुर्ज खलीफा एकमात्र ऐसी इमारत है जिसे देखने के बाद लोग उससे जुड़ी एक-एक चीज को लेकर सोच में पड़ जाते हैं। जिनमें से एक तो बुर्ज खलीफा में लगी लिफ्टों की संख्या है। आपको जानकर हैरानी होगी कि, बुर्ज खलीफा में कुल 57 लिफ्ट और 8 एस्कलेटर हैं, जिनमें से कुछ लिफ्टें 10 मीटर प्रति सेकंड (लगभग 36 किमी/घंटा) की रिकॉर्ड गति से चलती हैं और 124वीं मंजिल तक जाने में केवल 60 सेकंड का समय लेती हैं, जो उन्हें दुनिया की सबसे तेज लिफ्टों में से एक बनाता है।

बुर्ज खलीफा का डार्क सीक्रेट
जैसा कि हमने आपको बताया कि, बुर्ज खलीफा की शान-ओ-शौकत इसे देखने वालों के दिमाग को एक बार तो झकझोर करेगी ही। बुर्ज खलीफा का डार्क सीक्रेट भी इसी से जुड़ा हुआ है। क्या आपको पता है कि दुनिया से बुर्ज खलीफा का एक डार्क सीक्रेट छिपाया गया है।दरअसल, बुर्ज खलीफा में सीवेज सिस्टम नहीं है और वहां टॉयलेट का मल और अपशिष्ट को ट्रकों में भरकर ले जाया जाता है और फिर डिस्पोज किया जाता है। अब आप सोच रहे हैं कि ऐसा कैसे होता है कि करोड़ों की इमारत बनाई गई और उसमें सीवेज की व्यवस्था ही नहीं है ? तो आपको बता बता दें कि, ये बुर्ज खलीफा का ऐसा काला सच है जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं।
सीवेज सिस्टम से क्यों नहीं जोड़ा गया
कई रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जाता है कि, बुर्ज खलीफा में शुरू में नगरपालिका की सीवेज व्यवस्था नहीं थी, और दुबई की रेत के खिसकने से उत्पन्न चुनौतियों और उच्च लागत के कारण कचरा बाहर ले जाने के लिए टैंकर ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन दुबई द्वारा अपने बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार करने और बुर्ज खलीफा सहित अधिकांश इमारतों को नई पाइपलाइनों और उपचार संयंत्रों के साथ आधुनिक सीवेज प्रणालियों से जोड़ने के बाद यह समस्या काफी हद तक हल हो गई है, हालांकि फव्वारों के लिए वॉटर रिसाइकलिंग अभी भी एक प्रमुख समस्या बनी हुई है।
पहले बुर्ज खलीफा में कैसे डिस्पोज होता था मल
बता दें कि, बुर्ज खलीफा के निर्माण के समय ये दुबई के मुख्य सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ी थी। इसके 1,600 टॉयलेट से निकलने वाले कचरे को बेस पर ही एकत्र किया जाता था और टैंकर ट्रकों द्वारा ले जाया जाता था, जिससे कभी-कभी उपचार प्लांट्स पर लंबी कतारें लग जाती थीं। बता दें कि, उस समय दुबई की अस्थिर रेत में पाइप बिछाना और उसका रखरखाव करना बहुत मुश्किल और महंगा माना जाता था।

अब की स्थिति क्या है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई ने नए सीवेज बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है, जिसमें 75 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क भी शामिल है, जो बुर्ज खलीफा सहित अधिकांश इमारतों को इस प्रणाली से जोड़ता है। मल-मूत्र से भरे ट्रक की कहानी शुरू में सच थी, लेकिन यह काफी हद तक अतीत की बात है। क्योंकि दुबई में अब एक मजबूत, आधुनिक सीवेज प्रणाली है जो बुर्ज खलीफा की सेवा करती है। शहर में अब उन्नत गुरुत्वाकर्षण-आधारित प्रणालियों का उपयोग किया जाता है और उपचार क्षमता में सुधार हुआ है। सिंक और शॉवर के पानी को दुबई फाउंटेन और आसपास की हरियाली के लिए पुनर्चक्रित किया जाता है, जो उन्नत जल संरक्षण का प्रदर्शन करता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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