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आतंकवाद पर ट्रंप की आलोचना से परेशान पाकिस्तान ईरान की ‘शरण’ में

 Reported By: Bhasha
 Published : Sep 11, 2017 09:34 pm IST,  Updated : Sep 11, 2017 09:34 pm IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की आलोचना किए जाने जाने के बाद से पाकिस्तान परेशान है और यही वजह है कि पाक विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ईरानी नेताओं से मुलाकात की...

Khawaja Asif- India TV Hindi
Khawaja Asif | AP Photo

इस्लामाबाद: आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की आलोचना किए जाने जाने के बाद पाक विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश के प्रति समर्थन जुटाने के प्रयास के तहत सोमवार को ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। रेडियो पाकिस्तान ने खबर दी है कि आसिफ ने तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी से भेंट की और क्षेत्र की नवीनतम स्थिति एवं द्विपक्षीय संबंध के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष जव्वाद जरीफ से भी मुलाकात की।

आसिफ की पहली अमेरिका यात्रा से पूर्व पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ऐलान किया था कि वह पाकिस्तान के प्रति समर्थन जुटाने के लिए चीन, रूस, तुर्की और ईरान की यात्रा करेंगे। दरअसल ट्रंप ने दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान के लिए अपनी नीति की घोषणा करते हुए इस बात को लेकर पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई थी कि अफगानिस्तान में अमेरिकियों की जान लेने वाले अराजकता के एजेंटों को वह सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि आतंकवादी संगठनों को प्रश्रय देने पर उसे काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान इन आरोपों से परेशान है। आसिफ के साथ उनकी ईरान यात्रा में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर खान जांजुआ और विदेश सचिव तहमीना जांजुआ भी हैं।

विदेश मंत्री आसिफ ने इससे पहले चीन की यात्रा की थी और अपने चीनी समकक्ष वांग यी से नई अमेरिकी नीति पर चर्चा की थी। पाकिस्तान के प्रति समर्थन जुटाने के प्रयास के तहत आसिफ के इस महीने के आखिर में तुर्की जाने और अपने रूसी समकक्ष से मिलने की संभावना है। दरअसल पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। इस बीच आसिफ ने ईरान की संवाद समिति से कहा, ‘कहने की जरुरत नहीं है कि अमेरिकियों का रुख, जो सैन्य रुख है, 16 साल बाद भी अफगानिस्तान में शांति लाने में विफल रहा है और सैन्य हल काम नहीं करेगा। मैं निकट भविष्य में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के मौके पर अपने रूसी समकक्ष से मिलने और उनके साथ अफगानिस्तान मुद्दे पर शांतिपूर्ण पहल पर चर्चा करने की भी योजना बना रहा हूं।’

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