Jaish-e-Mohammed News: पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने एक बार फिर अपनी खतरनाक साजिश को अंजाम देने के लिए नए रास्ते तलाश लिए हैं। भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' में बुरी तरह मार खाने और अपने प्रमुख ठिकानों के तबाह होने के बाद जैश अब डिजिटल हवाला के जरिए चंदा इकट्ठा कर रहा है। जैश इस चंदे की मदद से पाकिस्तान में 313 नए मरकज (आतंकी ट्रेनिंग कैंप) बनाना चाहता है और अपने सरगना मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने तैयार करना चाहता है।
7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 आम नागरिकों की जान चली गई थी। ऑपरेशन में जैश के प्रमुख मरकज, जैसे मरकज सुभान अल्लाह, मरकज बिलाल, मरकज अब्बास, महमोना जोया और सरगल पूरी तरह तबाह हो गए थे।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जैश अब फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की निगरानी से बचने के लिए डिजिटल हवाला का सहारा ले रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के संरक्षण में जैश ने 'ईजीपैसा' और 'सदापे' जैसे डिजिटल वॉलेट्स के जरिए 2000 से ज्यादा खाते खोले हैं। इन खातों में चंदे के नाम पर अरबों रुपये जमा किए जा रहे हैं। जैश का लक्ष्य अगले एक साल में 3.94 अरब पाकिस्तानी रुपये इकट्ठा करना है, जिसका इस्तेमाल नए मरकज बनाने और हथियार खरीदने में होगा।

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह पैसा मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों, जैसे उनके बेटे अब्दुल्ला अजहर और भाई तल्हा अल सैफ के डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जा रहा है। तल्हा के नाम पर एक सदापे खाता हरिपुर के जैश कमांडर आफताब अहमद के मोबाइल नंबर से जुड़ा है, जिसका पता हरिपुर के खाला बट्ट टाउनशिप में जैश के कैंप से मिलता है। वहीं, अब्दुल्ला अजहर के नाम से ईजीपैसा खाता और मसूद के बेटे हम्माद अजहर के नाम से एक अन्य वॉलेट भी सक्रिय है।
जैश धार्मिक आड़ में चंदा जुटाने के लिए मस्जिदों और गाजा की मदद के नाम का सहारा ले रहा है। हर जुमे को मस्जिदों में चंदा इकट्ठा किया जा रहा है। इसके अलावा, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जैश के छद्म अकाउंट्स और कमांडरों के अकाउंट्स के जरिए पोस्टर, वीडियो और मसूद अजहर की एक चिट्ठी भी शेयर की जा रही है। इस चिट्ठी में मसूद ने कहा है कि जैश पूरे पाकिस्तान में 313 मरकज बनाएगा। तल्हा अल सैफ का एक ऑडियो भी जैश के आधिकारिक प्रचार चैनल 'MSTD ऑफिशियल' पर 15 अगस्त को जारी किया गया, जिसमें उसने मरकज उस्मान-ओ-अली में चंदे की अपील की थी।
बाहवलबुर में स्थित अल रहमत ट्रस्ट, जो लंबे समय से जैश से जुड़ा है, इस फंडिंग में अहम भूमिका निभा रहा है। यह ट्रस्ट मसूद अजहर और उसके करीबी सहयोगियों द्वारा संचालित होता है और इसके बैंक खातों के जरिए भी पैसा इकट्ठा किया जा रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस चंदे का बड़ा हिस्सा आतंकियों के पालन-पोषण, हथियारों की खरीद और नए आतंकी हमलों की तैयारी में इस्तेमाल हो रहा है। हाल के दिनों में जैश ने मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसे हथियार खरीदे हैं।
पाकिस्तान ने FATF की ब्लैक लिस्ट से निकलने के लिए 2022 में जैश के मरकजों को सरकारी नियंत्रण में लेने और मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर और तल्हा अल सैफ के बैंक खातों पर प्रतिबंध लगाने का दावा किया था। लेकिन हकीकत यह है कि डिजिटल वॉलेट्स के जरिए जैश की फंडिंग अब भी जारी है। पाकिस्तान केवल बैंक खातों का ब्यौरा दिखाकर FATF को यह झूठा दावा करता है कि उसने जैश की फंडिंग रोक दी है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जैश के 313 नए मरकज बनाने के पीछे 2 बड़े मकसद हैं। पहला, लश्कर-ए-तैयबा की तर्ज पर अपने आतंकी ट्रेनिंग कैंपों का जाल बढ़ाना ताकि भविष्य में ऑपरेशन सिंदूर जैसे भारतीय हमलों से बचा जा सके। दूसरा, मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित और आलीशान ठिकाने तैयार करना। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास जैश के मोबाइल नंबरों और CNIC (पाकिस्तानी पहचान पत्र) का पूरा ब्यौरा मौजूद है। एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल वॉलेट्स के जरिए होने वाले वॉलेट-टू-वॉलेट और वॉलेट-टू-कैश ट्रांसफर को ट्रैक करना FATF के लिए लगभग असंभव है, क्योंकि यह केवल बैंकिंग नेटवर्क को ही देखता है।
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