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बिहार चुनाव: अगिआंव विधानसभा सीट पर वामदल का है बोलबाला, पिछले तीन चुनाव में 2 बार दर्ज की जीत, जानिए समीकरण

भोजपुर जिले में पड़ने वाली अगिआंव विधानसभा क्षेत्र में पिछले साल ही लोकसभा चुनाव के साथ उपचुनाव हुआ था। उपचुनाव में इस सीट से वामपंथी पार्टी CPI-ML ने जीत दर्ज की थी।

Written By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Sep 26, 2025 11:50 pm IST, Updated : Nov 12, 2025 03:52 pm IST
Agiaon_Assembly_constituency- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV GFX अगिआंव विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज है। ऐसे में बिहार की खास सीटों की बात करें तो भोजपुर जिले की अगिआंव विधानसभा क्षेत्र इनमें से एक है। इस सीट पर सियासी दलों की नजरें जमी हैं। ये सीट पूरी तरह से ग्रामीण इलाके में फैली हुई है। इस सीट पर अनुसूचित जाति (SC) का अनुपात 18.3 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) मात्र 0.03 प्रतिशत है। 

CPI-ML जैसी वामपंथी पार्टियों का प्रभाव

आरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा यह सीट दलित-ओबीसी समीकरण पर टिकी है, जहां CPI-ML जैसी वामपंथी पार्टियों का लंबे समय से प्रभाव रहा है। 2025 चुनाव में NDA और महागठबंधन के बीच यहां कांटे की टक्कर की उम्मीद है।

जानीए इस सीट का जातीय समीकरण

अगिआंव में जातिगत समीकरण विकास और वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं। अनुसूचित जाति (SC) मतदाता 18.3 प्रतिशत हैं, जो सीट का मुख्य आधार हैं और महागठबंधन (खासकर CPI-ML) को मजबूत समर्थन देते हैं। मुस्लिम वोटर करीब 6 प्रतिशत हैं, जो अक्सर महागठबंधन के साथ रहते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जैसे यादव (15-20 प्रतिशत) और कुशवाहा-कोएरी (10-15 प्रतिशत) भी विपक्ष की ओर झुकाव रखते हैं।

जानिए क्यों महागठबंधन को होता है फायदा?

राजपूत और भूमिहार जैसे ऊपरी जाति वोटर (10-12 प्रतिशत) NDA के पक्ष में हैं, जबकि ईबीसी (अति पिछड़ा वर्ग) वोट बंटे हुए हैं। दलित-मुस्लिम-यादव गठजोड़ से महागठबंधन को फायदा होता है, जबकि NDA ऊपरी जातियों और विकास के एजेंडे पर निर्भर है। 2024 लोकसभा चुनाव में CPI-ML ने आरा सीट जीती और अगिआंव में लीड की, जो महागठबंधन की ताकत दिखाता है।

इस सीट पर महागठबंधन का रहा दबदबा 

अगिआंव सीट 2008 की परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है। पिछले तीन चुनावों (2015, 2020, 2024 उपचुनाव) में महागठबंधन का दबदबा रहा है। वामपंथी उम्मीदवारों ने यहां लगातार सफलता पाई, जबकि NDA को झटके लगे हैं। 

उपचुनाव में CPI-ML ने दर्ज की जीत

2024 विधानसभा उपचुनाव  में CPI-ML के शिव प्रकाश रंजन ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने JDU के उम्मीदवार को करीब 29,000 वोटों से हराया (वोट शेयर: CPI-ML 53 प्रतिशत से अधिक) था। यह उपचुनाव 2024 लोकसभा चुनाव के साथ हुआ था, जहां दलित-मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण निर्णायक साबित हुआ था। 

CPI-ML के मनोज मंजिल ने दर्ज की जीत

2020 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की CPI-ML के मनोज मंजिल ने 86,327 वोट (61.39 प्रतिशत वोट शेयर) हासिल कर JDU के प्रभुनाथ प्रसाद (37,777 वोट, 26.87 प्रतिशत) को 48,550 वोट (31.42 प्रतिशत अंतर) से करारी शिकस्त दी थी। यह जीत महागठबंधन की लहर का परिणाम थी, जहां युवा और दलित मतदाताओं ने वामपंथी एजेंडे को समर्थन दिया था।

2015 में JDU के प्रभुनाथ प्रसाद ने जीता चुनाव

2015 विधानसभा चुनाव में JDU के प्रभुनाथ प्रसाद ने 52,276 वोट (40.03 प्रतिशत) से BJP के शिवेश कुमार (37,572 वोट, 28.77 प्रतिशत) को 14,704 वोट (11.64 प्रतिशत अंतर) से हराया था। उस समय महागठबंधन (JDU-RJD) का दौर था। यादव-दलित समीकरण ने NDA को पीछे धकेल दिया था।

इस बार क्या हो सकता है चुनावी समीकरण?

ये परिणाम बताते हैं कि अगिआंव में महागठबंधन की पकड़ मजबूत है, लेकिन 2025 में BJP-JDU गठबंधन विकास और केंद्रीय योजनाओं के नाम पर चुनौती दे सकता है। मनोज मंजिल की गिरफ्तारी के बाद उपचुनाव में CPI-ML की जीत ने विपक्ष को उत्साहित किया है। क्या 2025 में NDA वापसी करेगा, या महागठबंधन हैट्रिक लगाएगा? चुनावी घड़ी बताएगी।

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