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UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई, सामान्य वर्ग के खिलाफ 'भेदभाव' का आरोप

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jan 28, 2026 11:38 pm IST,  Updated : Jan 29, 2026 06:33 am IST

सुप्रीम कोर्ट यूजीसी के हाल में अधिसूचित एक नियम को चुनौती देने वाली उस याचिका पर गुरुवार को सुवाई करेगा जिसमें यह दलील दी गई है कि नियम में जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित 'UGC रेगुलेशन 2026' के खिलाफ दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करेगी। वकील विनीत जिंदल की ओर से इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण है। नए नियम से मौलिक अधिकारों का हनन होता है। 

हमें पता है कि क्या हो रहा है-सीजेआई

वकील विनीत जिंदल की ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि UGC रेगुलेशन 2026 के रेगुलेशन 3(c) को लागू करने पर रोक लगाई जाए।2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो। आज मामले की मेंशनिंग के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है। इस पर CJI सूर्यकांत ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर कर दी जाएं। हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।"

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक्ट में बदलाव

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही सरकार ने UGC एक्ट में बदलाव किए और नए नियम 13 जनवरी को जारी किए गए। लेकिन इनका विरोध हो रहा है। सामान्य वर्ग के छात्रों में जबरदस्त नाराजगी है। आज याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि इस एक्ट में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है उससे ऐसा लगता जैसे जातिगत भेदभाव सिर्फ  SC, ST और OBC के साथ ही होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को ना तो कोई संस्थागत संरक्षण दिया गया है, ना ही उनके लिए कोई grievance redressal system की व्यवस्था है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि वैसे तो इस एक्ट को समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है, लेकिन ये खुद भेदभाव बढ़ाता है। इसमें General Caste यानी सवर्णों को 'नेचुरल ऑफेंडर' माना गया है इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए। जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला नहीं करता तब तक नए एक्ट के इंप्लीमेंटेशन पर रोक लगनी चाहिए।

क्या है नया UGC नियम?

13 जनवरी 2026 को अधिसूचित इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना और भेदभाव की शिकायतों की जांच करना है। इसके लिए हर संस्थान में एक 'समता समिति' बनाना अनिवार्य है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं की मांग है कि यह व्यवस्था किसी विशेष जाति तक सीमित न होकर सभी जातियों के व्यक्तियों के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए।

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