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वास्तु शास्त्र में हर दिशा का अपना खास महत्व होता है। खासतौर पर उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को बहुत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस दिशा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। लेकिन अगर इस दिशा में वास्तु दोष हो जाए, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। आज हम जानेंगे कि उत्तर-पूर्व दिशा में वास्तु संबंधी समस्या होने से क्या-क्या परेशानियां आ सकती हैं।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे पवित्र और संवेदनशील दिशा माना गया है। इस दिशा में किसी भी तरह की भारी संरचना या गलत निर्माण से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है। अगर आपने अपने घर की उत्तर-पूर्व दिशा में स्टोर रूम या भंडारगृह बनवा रखा है, तो यह एक गंभीर वास्तु दोष माना जाता है।
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इस दिशा में स्टोर रूम बनाने से घर में तनाव का माहौल बन सकता है। खासतौर पर पिता और पुत्र के रिश्ते में मनमुटाव, गलतफहमियां और दूरी बढ़ने की आशंका रहती है। कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के आपसी बातचीत कम हो जाती है और रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा में केवल हल्की और साफ जगह होनी चाहिए। यहां भारी सामान, कबाड़ या बंद कमरे का होना शुभ नहीं माना जाता। स्टोर रूम के अलावा इस दिशा में रसोई घर बनाना भी गलत होता है।
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ऐसा करने से परिवार के सदस्यों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बार-बार बीमार पड़ना, मानसिक तनाव और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
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इतना ही नहीं, अगर उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय बना हो, तो यह भी गंभीर वास्तु दोष माना जाता है। इससे घर में नकारात्मकता बढ़ती है और सुख-शांति प्रभावित होती है। बच्चों की पढ़ाई में मन न लगना, निर्णय लेने में परेशानी और आर्थिक रुकावटें भी देखने को मिल सकती हैं।
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वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ, खुला और हल्का रखना चाहिए। यहां पूजा स्थान या जल से जुड़ी व्यवस्था होना शुभ माना जाता है। सही वास्तु अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा, बेहतर स्वास्थ्य और अच्छे रिश्ते बनाए रखे जा सकते हैं।