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'और कितना सुखाओगे?' चंडीगढ़ की ऐतिहासिक सुखना झील पर SC की तल्ख टिप्पणी, जानें क्यों कहा ऐसा

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Kajal Kumari
 Published : Jan 21, 2026 04:13 pm IST,  Updated : Jan 21, 2026 04:27 pm IST

चंडीगढ़ की ऐतिहासिक सुखना झील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है और कहा है, सुखना झील को और कितना सुखाओगे? जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या क्या कहा?

ऐतिहासिक सुखना झील पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- India TV Hindi
ऐतिहासिक सुखना झील पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी Image Source : WIKIPEDIA

चंडीगढ़ की एतिहासिक सुखना झील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा-सुखना झील को और कितना सुखाओगे? CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने हरियाणा सरकार को पिछली गलतियों को न दोहराने की चेतावनी देते हुए कहा, अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत से सुखना झील पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। SC ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर माफिया एक्टिव हैं आप सुखना झील को और कितना सुखाओगे, आपने झील को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। पर्यावरण से जुड़े टीएन गोदावरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी।


जानें कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बिल्डर माफिया और नौकरशाहों के बीच मिलीभगत को देखते हुए चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई और दायर अंतरिम आवेदनों की सुनवाई की।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक अधिवक्ता की ओर से झील से संबंधित याचिका का उल्लेख करने पर मौखिक टिप्पणी की, 'और कितना सुखाओगे सुखना लेक (झील) को? पंजाब में राजनीतिक दलों के समर्थन और नौकरशाहों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप झील पूरी तरह से नष्ट हो रही है. वहां सभी बिल्डर माफिया सक्रिय हैं।'

 कोर्ट ने जताया था आश्चर्य- सुप्रीम कोर्ट में क्यों आ रहे हैं मामले?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया था और कहा था कि जंगलों और झीलों से संबंधित सभी मामले हाईकोर्ट्स को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में क्यों आ रहे हैं? मुख्य न्यायाधीश ने सुखना झील मामले से संबंधित एक आवेदन का जिक्र करते हुए कहा था कि जाहिर तौर पर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निजी डेवलपर्स और अन्य लोगों के इशारे पर दोस्ताना मुकाबला चल रहा है। बता दें कि चंडीगढ़ की सुखना झील से संबंधित मुकदमा मुख्य रूप से हाईकोर्ट की ओर से इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था।

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