''सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा..हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा'' अल्लामा इक़बाल की ये लाइन हर हिंदुस्तानी के दिल में गूंजती हैं और उसकी वजह है--26 जनवरी 1950 को लागू किया गया--'भारत का संविधान' जो देश के हर नागरिक को समानता और अभिव्यक्ति की आजादी देता है..उसी की बदौलत देश तरक्की-अमन-शांति-समृद्धि की राह पर अग्रसर है।आप किसी भी फील्ड में देख लीजिए- स्पोर्ट्स..एजुकेशन..एग्रीकल्चर..आईटी सेक्टर..सर्विस सेक्टर हर जगह भारतीयों का बोलबाला है।वैसे..ये सारी उपलब्धियां ऐसे ही हिंदुस्तान की झोली में आकर नहीं गिरी।इसके लिए पहले आजादी के दीवानों ने अंग्रेजों से लोहा लिया फिर हमारे वीर जवानों ने--घर से लेकर बॉर्डर तक को सुरक्षित रखने का जिम्मा उठाया।
इसमें कोई शक नहीं कि हमारे वैज्ञानिकों का रोल भी अहम रहा चाहे वो पुष्पक की लैंडिंग हो या फिर 'प्रोबो-थ्री मिशन' या फिर दो स्पेसक्राफ्ट को सक्सेसफुली डॉक करने वाला चौथा देश बनना।''जय जवान,जय किसान,जय विज्ञान'' का मंत्र लिए देश तरक्की कर रहा है लेकिन एक जगह है-- जहां देशवासियों को थोड़ा और मुस्तैदी दिखानी होगी और वो है सेहत का मोर्चा जहां लोग लगातार पीछे हट रहे हैं।देश में 64% लोग ऐसे हैं..जिन्हें वर्कआउट करना पसंद नहीं है उन्हें ये समझाना होगा--''जब मेहनत करेंगे जीरो तो लाइफ में कैसे बनेंगे हीरो' इरादा अगर आसमान को छूने का है..तो इसमें हर किसी को योगदान देना होगा.।तो चलिए, रिपब्लिक डे के मौके पर..स्वामी रामदेव के साथ योग पथ पर चलने का संकल्प लेते हैं और योग को अपनी जीवनशैली में शामिल करें
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