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पुराने वाहन तोड़ने की नीति को मिली मंजूरी, 20 साल पुरानी कमर्शियल गाड़ियां होंगी खत्म

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 16, 2018 10:30 pm IST,  Updated : Mar 16, 2018 10:30 pm IST

पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की बहुप्रतीक्षित वाहन कबाड़ नीति को प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई।

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नयी दिल्ली: पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की बहुप्रतीक्षित वाहन कबाड़ नीति को प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई। यह नीति एक अप्रैल 2020 से लागू होगी। इस नीति के तहत 20 साल से ज्यादा पुराने वाणिज्यिक वाहनों को अनिवार्य तौर पर सड़कों से हटा दिया जाएगा। उन्हें तोड़कर कबाड़ में तब्दील किया जाएगा। 

सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के वाहन कबाड़ नीति को अंतिम रूप दिये जाने की घोषणा के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। इसका लक्ष्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। एक अधिकारी ने नाम नहींछापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस नीति को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी गई। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिव भी उपस्थित थे। 

अधिकारी ने बताया कि यह नीति एक अप्रैल 2020 से लागू होगी और वाणिज्यिक वाहनों की उम्र 20 वर्ष तय कर दी गई है। इससे अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहन सड़कों पर नहीं चलेंगे। बैठक में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत और वित्त मंत्रालय, सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्रालय इत्यादि के सचिव उपस्थित थे। 

घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस नीति को जीएसटी परिषद में भेजा जाएगा जहांपुराने तोड़कर कबाड़ में तब्दील किये गये वाणिज्यिक वाहनों के स्थान पर खरीदे जाने वाले नए वाणिज्यिक वाहनों पर जीएसटी दर को 28% से घटाकर 18% करने का अनुरोध किया जाएगा। जीएसटी परिषद इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली छूट की राशि पर निर्णय करेगी। 

सूत्रों के अनुसार पुराने वाहन के स्थान पर नया वाहन खरीदने पर बिल्कुल नये वाहन के दाम के मुकाबले 15-20% तक का लाभ मिल सकता है। यह पूछे जाने पर कि इस फैसले के लिये मंत्रिमंडल की अनुमति लेनी होगी? अधिकारी ने कहा कि हालांकि इसके लिये केबिनेट मंजूरी की जरूरत नहीं है लेकिन यह बड़ा फैसला है इसलिये इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिये भेजा जा सकता है। वित्त मंत्रालय पहले ही इस नीति पर सहमति दे चुका है। 

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