24 January 2026 Ka Panchang: आज माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और शनिवार का दिन है। षष्ठी तिथि आज पूरा दिन पार करके देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। आज के दिन शीतला षष्ठी व्रत भी है और मां शीतला की पूजा की जाएगी। आज दोपहर 2 बजकर 2 मिनट तक शिव योग रहेगा। साथ ही आज दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
24 जनवरी 2026 का शुभ मुहूर्त
माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि- 24 जनवरी 2026 को देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 32 से 6 बजकर 23 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से दोपहर 1 बजकर 13 मिनट तक
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र - 24 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक
शिव योग - 24 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 2 मिनट तक
24 जनवरी 2026 व्रत-त्यौहार- शीतला षष्ठी व्रत
शीतला षष्ठी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त में जागना और प्रथम पूजन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में धार्मिक गतिविधियां आरम्भ करने के लिए इस शुभ मुहूर्त में (षष्ठी तिथि-सुबह 5 बजकर 32 से 6 बजकर 23 मिनट तक) उठने का सुझाव दिया जाता है। वहीं, आज प्रातः पूजन-वंदन के लिए सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 14 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।
24 जनवरी 2026 राहुकाल का समय
दिल्ली- सुबह 09:53 से दोपहर पहले 11:13 तक
मुंबई- सुबह 10:03 से दोपहर पहले 11:27 तक
चंडीगढ़- सुबह 09:57 से दोपहर पहले 11:16 तक
लखनऊ- सुबह 09:37 से सुबह 10:58 तक
भोपाल- सुबह 09:48 से दोपहर पहले 11:10 तक
कोलकाता- सुबह 09:04 से सुबह 10:26 तक
अहमदाबाद- सुबह 10:07 से दोपहर पहले 11:29 तक
चेन्नई- सुबह 09:28 से सुबह 10:55 तक
24 जनवरी 2026 सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय - सुबह 7:14 AM
- सूर्यास्त - शाम 6:27 PM
शीतला षष्ठी का महत्व
हर साल माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी को शीतला षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, यह पूजा इस दिन केवल बंगाल में ही होती है, लेकिन आप भी शीतला माता की पूजा और व्रत करके लाभ पा सकते है। आज के दिन व्रत रखने से संतान पक्ष की ओर से खुशखबरी और अनंत सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति कि इच्छा है उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चहिए। शास्त्रों के अनुसार, शीतला माता को ठंडी चीजों से लगाव है। इसलिए उन्हें ठंडी चीजों का भोग लगता है। शीतला षष्ठी से एक दिन पहले पकवान बनाए जाते हैं और अगले दिन जल्दी उठकर पूजा के बाद देवी मां को बांसी और ठंडा खाने का भोग अर्पित किया जाता है और व्रती भी वही खाना खाते हैं। एक दिन पहले भोग बनाना सम्भव ना हो तो सुबह जल्दी उठकर पकवान बनाकर शाम को पूजा की जा सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें: बुध-अरुण का त्रिदशांक योग लाएगा बेहिसाब धन, इन 4 राशियों को निवेश लाभ और करियर में उन्नति के प्रबल योग