भारत की अर्थव्यवस्था नोटबंदी तथा जीएसटी के क्रियान्वयन से उबर गयी है और इसकी वृद्धि चालू वित्त वर्ष 2018-19 में 7.4 प्रतिशत तथा आगे और बढ़ कर 7.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की रपट के अनुसार एशिया इस समय दुनिया की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन बना हुआ है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि में इस क्षेत्र का योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 3.216 अरब डॉलर घटकर 420.366 अरब डॉलर रह गया, जो 28,025.5 अरब रुपए के बराबर है।
अपने सर्वकालिक उच्चस्तर को छूने के बाद देश का विदेशी मुद्रा भंडार 20 अप्रैल को समाप्त हफ्ते में 2.499 अरब डॉलर घटकर 423.582 अरब डॉलर रह गया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2017-18 में मजबूत प्रदर्शन किया और चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि और तेज होने की उम्मीद है।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर अब तक के सर्वकालिक स्तर 426.08 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कहना है कि भारत द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों के परिणाम सामने आने लगे हैं और इससे लोगों को फायदा भी हुआ है। इससे इस तरह के और कदम उठाने का आधार मजबूत हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) का अनुमान है कि 2018 में भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहेगी, जो 2019 में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो जाएगी। वहीं इन दो वर्षों के दौरान चीन की सकल घरेलू उत्पाद (GDP जीडीपी ) की वृद्धि दर क्रमश : 6.6 और 6.4 प्रतिशत रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने गुरुवार को कहा कि भारत को आधार जैसे वृहद पहचान कार्यक्रम के क्रियान्वयन में गोपनीयता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने आज सरकारों को कड़ी चेतावनी देते हुए उनसे संरक्षणवादी व्यापार नीतियों से बचने के लिए कहा इनसे वैश्विक वृद्धि को नुकसान पहुंच रहा है।
देश का विदेशी पूंजी भंडार (फॉरेक्स) 23 मार्च को समाप्त सप्ताह में 1.19 अरब डॉलर बढ़कर 422.53 अरब डॉलर हो गया, जो 27,514.5 अरब रुपए के बराबर है।
उल्लेखनीय है कि IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टिन लगार्ड अगले महीने की शुरुआत में चीन का दौरा करने वाली हैं। वह बेल्ट ऐंड रोड परियोजना पर पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना तथा IMF के संयुक्त सम्मेलन में भाग लेंगी...
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष( आईएमएफ) ने आज कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के दो अस्थायी झटकों के बाद इस साल भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज हो सकती है जबकि चीन की वृद्धि रफ्तार धीरे धीरे कम होने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष( आईएमएफ) की प्रमुख ने आजदुनिया के देशों को व्यापार युद्ध के प्रति आगाह करते हुए चेतावनी दी कि इससे न केवल वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी बल्कि इसमें किसी को भी जीत हासिल नहीं होगी।
IMF ने कहा कि भारत को अब शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधारों पर ध्यान देना चाहिए तथा बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली की दक्षता को सुधारना चाहिए
देश का विदेशी पूंजी भंडार 2 मार्च को समाप्त सप्ताह में 16.78 करोड़ डॉलर बढ़कर 420.75 अरब डॉलर हो गया, जो 27,435.7 अरब रुपए के बराबर है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्पात और अल्यूमीनियम आयात पर भारी शुल्क लगाये जाने के निर्णय से अमेरिका तथा उसके व्यापार सहयोगियों को नुकसान हो सकता है।
स्वर्ण भंडार और मुख्य मुद्रा आस्तियों में अच्छी वृद्धि होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो फरवरी को समाप्त सप्ताह में 4.12 अरब डॉलर बढ़कर 421.91 अरब डॉलर की सर्वकालिक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि 2018 और 2019 में में चीन की वृद्धि दर क्रमश: 6.6 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि भारत में 7.4 और 7.8 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान है
आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में जताए अनुमान के मुताबिक मौजूदा साल यानी 2018 में भारत की विकास दर 7.4 फीसदी रहेगी जबकि अगले साल 2019 में भारत की विकास दर बढ़कर 7.8 फीसदी हो जाएगी।
लजीज देसी व्यंजनों और योग सत्र की झलक के साथ कल से दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक शुरू होगी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे जहां वह भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ इंजन के रूप में पेश कर सकते हैं।
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