रिपोर्ट में कहा गया है कि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध है, जिससे वित्तीय स्थिति को सहारा मिलेगा। अच्छा मॉनसून और रेपो रेट में कटौती घरेलू वृद्धि को सहारा देंगे।
थोक महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसार, जून में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 3.75 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि मई में इनमें 1.56 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
मई 2025 की तुलना में जून 2025 की मुख्य मुद्रास्फीति में 72 बेसिस पॉइंट्स (0.72 प्रतिशत) की गिरावट आई है। ये जनवरी 2019 के बाद साल-दर-साल सबसे कम मुद्रास्फीति है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई के संबंध में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के 4.2 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) चालू वित्त वर्ष के लिए 2.7 प्रतिशत से ज्यादा रहेगा।
थोक महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य पदार्थों में 1. 56 प्रतिशत की अपस्फीति देखी गई, जबकि अप्रैल में 0. 86 प्रतिशत की अपस्फीति थी। इस दौरान सब्जियों की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों में बताया गया है कि मई में खाद्य मुद्रास्फीति 0.99 प्रतिशत थी, जो एक साल पहले इसी महीने में 8.69 प्रतिशत से काफी कम है।
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में महंगाई की मार ने जनता की कमर तोड़ दी है। वहीं दूसरी तरफ भारत से करारी शिकस्त खाने के बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर झूठी जीत का जश्न मनाने में जुटे हैं और जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि दाम अभी भी बढ़ रहे हैं, यानी घर के बजट पर दबाव बना हुआ है।
श्रम विभाग की रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल की शुरुआत में लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का अभी तक कई चीजों की कीमतों पर बहुत खास प्रभाव नहीं पड़ा है।
अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर लगभग 6 साल के निचले स्तर 3.16 प्रतिशत पर आ गई, जिसका मुख्य कारण सब्जियों, फलों, दालों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में नरमी है, और यह रिजर्व बैंक के आरामदायक दायरे में बनी हुई है।
इस साल बेहतर मानसून होने की उम्मीद से किसानों की आय बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति फरवरी 2025 में 2.38 प्रतिशत दर्ज की गई थी। आने वाले महीनों में भी महंगाई के तेवर नरम रहने की उम्मीद है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर मार्च में घटकर 2.05 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 2.38 प्रतिशत थी।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट घटाए जाने से आम लोगों को सीधा फायदा होगा। अब जब बैंकों को आरबीआई से सस्ता लोन मिलेगा, तो आम लोगों को भी बैंकों से सस्ता लोन मिलेगा।
महंगाई को नियंत्रण करने के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड वॉर के बीच नीति निर्माताओं ने आर्थिक विकास को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया है।
ऑस्ट्रेलिया में मई में होने वाले चुनावों में महंगाई, घरों की बढ़ती कीमतें, ऊर्जा नीति, और चीन के साथ संबंध प्रमुख मुद्दे हैं। विपक्ष और सरकार के बीच इनमें से कई मुद्दों पर गहरे मतभेद हैं।
फरवरी, 2025 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, खाद्य वस्तुओं, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं और वस्त्र निर्माण आदि के मूल्यों में वृद्धि के कारण है।
सरकार की तरफ से ताजा आंकड़ों में कहा गया है कि खुदरा महंगाई जनवरी के मुकाबले फरवरी में घटी। फरवरी में आई यह गिरावट चालू वित्तीय वर्ष में सिर्फ तीसरी बार है जब महंगाई की दर 4 प्रतिशत से नीचे आई है।
जनवरी 2025 में थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले महीने थोक महंगाई दर घटकर 2.31 प्रतिशत रही। बताते चलें कि इससे पिछले महीने यानी दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.37 प्रतिशत दर्ज की गई थी। शुक्रवार को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों से ये जानकारी मिली है।
सब्जियों की मुद्रास्फीति नवंबर में 28. 57 प्रतिशत के मुकाबले 28. 65 प्रतिशत रही। आलू की मुद्रास्फीति 93. 20 प्रतिशत पर उच्च स्तर पर बनी रही, और प्याज की दिसंबर में यह बढ़कर 16. 81 प्रतिशत हो गई।
संपादक की पसंद