खुदरा महंगाई में उछाल के बावजूद लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निचली सहनशील सीमा (2%) से नीचे बनी हुई है। मौजूदा स्तर पर महंगाई दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है।
डब्ल्यूपीआई में राहत के बावजूद, खुदरा महंगाई (सीपीआई) नवंबर में मामूली बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई (अक्टूबर में 0.25%)। विनिर्मित उत्पादों में भी महंगाई घटकर 1.33% रह गई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और प्रकाश मुद्रास्फीति नवंबर में 2.32% रही, जो अक्टूबर के 1.98% से अधिक है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक से पहले अर्थशास्त्रियों और निवेशकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि RBI अपने मैक्रोइकॉनॉमिक अनुमान में बड़े बदलाव कर सकता है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोलकाता में महंगाई दर सबसे अधिक 3.6% दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 3.4% रहा। लखनऊ और चंडीगढ़ में सबसे अधिक महंगाई दर रही।
जीएसटी कटौती और अनुकूल आधार के चलते अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट देखने को मिली है।
जानकार का कहना है कि घटती मुद्रास्फीति से आरबीआई को आर्थिक विकास को समर्थन देने का बेहतर अवसर मिला है। अगर चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में ग्रोथ रेट कमजोर होती है, तो ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश और बढ़ जाएगी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं।
पाकिस्तान एक बार फिर कमरतोड़ महंगाई की चपेट में आ गया है। यहां लोगों को खाने-पीने के लाले पड़ने लगे हैं। आटा, दाल, चावल से लेकर टमाटर और लहसुन, प्याज के दाम आसमान पहुंच रहे हैं। जनता सरकार को कोस रही है।
जानकार के मुताबिक, अक्टूबर में डब्ल्यूपीआई फिर से अपस्फीति की ओर बढ़ सकता है, और अक्टूबर 2025 में यह 0.5% तक पहुंच सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि 2025-26 के दौरान अब तक मुद्रास्फीति की स्थिति अनुकूल बनी हुई है, और वास्तविक परिणाम अनुमान से काफी कम रहे हैं।
पाकिस्तान में महंगाई चरम पर है। वहां गेहूं और चावल की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक तरफ तो बाढ़ दूसरी तरफ चावल और रोटी पर आफत, लोग परेशान हैं। जानिए क्या है इसकी वजह?
अगस्त महीने के दौरान सब्जियों, मांस, मछली और अंडों जैसी रसोई से जुड़ी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को अभी भी अपने नियंत्रण में मान रहा है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। बावजूद, खाद्य पदार्थों और मुख्य वस्तुओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की वजह से, अगस्त में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी देखी गई।
अमेरिका में महंगाई लगातार बढ़ रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कीमतें बढ़ने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। यहां गैस से लेकर खाने तक की चीजों के दाम बढ़ गए हैं।
WPI Inflation: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं, खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, और मूल धातुओं के निर्माण में आई कीमतों में गिरावट से मंहगाई में राहत मिली है।
सालाना आधार पर मांसाहारी थाली की लागत में 13% की राहत मिली है। मांसाहारी थाली की लागत ₹53.5 प्रति प्लेट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 13% और जून के मुकाबले 2% कम है।
मुद्रास्फीति पर गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर लगातार आठवें महीने गिरकर जून में 77 महीने के निचले स्तर 2.1 प्रतिशत पर आ गई।
रिपोर्ट में संभावित प्रभाव का विवरण देते हुए कहा गया है कि तेल की कीमतों में अचानक उछाल से महंगाई में गिरावट की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और नीतिगत सामान्यीकरण भी नाकाम हो सकता है।
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