राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और प्रकाश मुद्रास्फीति नवंबर में 2.32% रही, जो अक्टूबर के 1.98% से अधिक है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं।
विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है।
मई 2025 की तुलना में जून 2025 की मुख्य मुद्रास्फीति में 72 बेसिस पॉइंट्स (0.72 प्रतिशत) की गिरावट आई है। ये जनवरी 2019 के बाद साल-दर-साल सबसे कम मुद्रास्फीति है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों में बताया गया है कि मई में खाद्य मुद्रास्फीति 0.99 प्रतिशत थी, जो एक साल पहले इसी महीने में 8.69 प्रतिशत से काफी कम है।
अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर लगभग 6 साल के निचले स्तर 3.16 प्रतिशत पर आ गई, जिसका मुख्य कारण सब्जियों, फलों, दालों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में नरमी है, और यह रिजर्व बैंक के आरामदायक दायरे में बनी हुई है।
साल के पहले महीने में महंगाई में आम लोगों को राहत मिली है। ग्रामीण मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.76 प्रतिशत की तुलना में घटकर 4.64 प्रतिशत रह गई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि कि फूड बास्केट में मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 9. 24 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 5. 66 प्रतिशत थी। एक साल पहले महीने में 6. 62 प्रतिशत थी।
कृषि श्रमिकों (सीपीआई-एएल) और ग्रामीण मजदूरों (सीपीआई-आरएल) के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अगस्त 2024 में 7-7 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
अगस्त, 2024 में लगातार दूसरे महीने खुदरा महंगाई दर काबू में रही। अगस्त में खुदरा महंगाई दर 3.65 फीसदी रही।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जून में 5.08 प्रतिशत थी। जबकि बीते साल जुलाई में यह 7.44 प्रतिशत थी।
आपको बता दें कि खुदरा मुद्रास्फीति खुदरा अप्रैल में मामूली घटकर 4.83 प्रतिशत पर रही। मार्च में यह 4.85 प्रतिशत के स्तर पर थी।
सरकार ने खुदरा मुद्रास्फीति दर का आंकड़ा जारी कर दिया है, जो पिछले 9 महीने के न्यूनतम स्तर पर है। मार्च में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दर 4.85 प्रतिशत रही है, जो पिछले साल जून के 4.81 प्रतिशत के बाद सबसे कम है।
Inflation Tomato: देश में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। आम आदमी की थाली से सब्जी और जेब से पैसे दोनों गायब हो रहे हैं। अब इस आंकड़े ने एक नई चिंता पैदा कर दी है।
Rbi Repo Rate: देश की आम जनता पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने जा रही है। इस बार RBI के रेपो रेट की बैठक में कुछ बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।
सोमवार को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई जनवरी में बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 6.52% पर पहुंच गई। दिसंबर 2022 में खुदरा महंगाई दर 5.72 फीसदी रही थी।
खाद्य मुद्रास्फीति की दर इस साल अगस्त में 6.46 प्रतिशत तथा इससे पिछले वर्ष के इसी महीने में 2.26 प्रतिशत की तुलना में सितंबर, 2022 में 7.76 प्रतिशत रही।
खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति की दर मार्च में बढ़कर 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से खुदरा मुद्रस्फीति मई महीने में बढ़कर 3.05 प्रतिशत पर रही।
उपभोक्ताओं के लिए यह अच्छी खबर है। खुदरा महंगाई दर (CPI) जुलाई में 4.17 फीसदी रही। इससे पिछले महीने में यह 4.90 फीसदी थी।
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