Wednesday, January 21, 2026
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अविमुक्तेश्वरानंद खुद को कैसे बता रहे शंकराचार्य? मेला प्रशासन ने पूछा, स्वामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी सफाई-VIDEO

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाते हैं। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम में नहाने से रोक दिया गया। इसके बाद से वह मेला स्थल पर ही अपने अनुयायियों के साथ विरोध प्रदर्शन करने लगे।

Reported By : Imran Laeek Edited By : Dhyanendra Chauhan Published : Jan 20, 2026 07:02 pm IST, Updated : Jan 20, 2026 07:31 pm IST
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती - India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मामला काफी गरमा गया है। मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा रोके जाने को लेकर जारी विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस जारी करके पूछा है कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मामले में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

नोटिस चिपका कर चले गए कानूनगो के लोग

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'मैंने कल भी अपनी बात रखी थी। देर रात प्रशासन अपने लाव लश्कर के साथ मेरे शिविर में पहुंचे और नोटिस लगा दिया। हम लोगों ने कहा कि सुबह 9 बजे आए और नोटिस दें लेकिन खुद को कानूनगो बताने वाले शख्स ने नोटिस रिसीव न करने पर नोटिस को चस्पा करके के चले गए।' 

सुप्रीम कोर्ट में वकील रखेंगे पूरा पक्ष

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'नोटिस में मुझसे स्पष्टीकरण मांगा गया कि 24 घंटों में जवाब दे कि मैंने अपने नाम की आगे शंकराचार्य कैसे लगाया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण कितनी तत्परता से काम कर रहा है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया। मेरी तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वकील पीएन मिश्रा अपना पक्ष रखेंगे।'

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जो हो गए ब्रह्मलीन

वकील पीएन मिश्रा ने बताया कि जैसा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने को शंकराचार्य कैसे लिखा सकते है। वकील ने बताया कि कोर्ट में एप्लीकेशन दी गई थी कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जो अब ब्रह्मलीन हो चुके हैं, उनकी तरफ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अब शंकरचार्य होंगे। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोग्य घोषित किया गया

कोर्ट में फर्जी हलफनामा लगाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोग्य घोषित किया गया। वकील ने कहा कि माघ मेले में 15 शंकराचार्य ऐसे बैठे है, जिनको सुविधाएं दी गई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के बारे में बताया। प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना चाहता है। 

वासुदेवानंद सरस्वती जी ने झूठा हलफनामा कोर्ट में लगाया

12 सितंबर 2022 को पट्टा अभिषेक हो चुका है। इनको चादर और तिलक लगाया गया था। 2023 में हमने शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जो अभी वहां लंबित है। वकील ने कहा कि वासुदेवानंद सरस्वती जी ने झूठा हलफनामा कोर्ट में लगाया है।  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने बताया कि हमारी तरफ से जो नोटिस प्रशासन की तरफ से दिया है उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया क्यों दी गई ये नोटिस

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया जा रहा है, उसमें शंकराचार्य का नाम न लगाए वो कहां लिखा है। हम कोई पट्टा अभिषेक माघ मेले में थोड़ी कर रहे है। केंद्र सरकार कोर्ट में पार्टी बनी है। तीन साल से कोई फैसला नहीं कराया गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि नोटिस इसलिए दिया गया है कि वो गौ हत्या बंद करने की मांग कर रहे है। एक नोटिस हमारी तरफ से भी प्रशासन को भेजा जा रहा है।'

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