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इटली आम चुनाव में बाजी मार सकता है दक्षिणपंथी गठबंधन: एग्जिट पोल

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 05, 2018 02:26 pm IST,  Updated : Mar 05, 2018 02:26 pm IST

इटली में रविवार को हुए आम चुनाव में देश के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लूस्कोनी का दक्षिणपंथी गठबंधन चुनाव जीत सकता है...

Silvio Berlusconi | AP Photo- India TV Hindi
Silvio Berlusconi | AP Photo

रोम: इटली में रविवार को हुए आम चुनाव में देश के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लूस्कोनी का दक्षिणपंथी गठबंधन चुनाव जीत सकता है। सरकारी चैनल RAI द्वारा सोमवार को जारी एग्जिट पोल में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोल में बर्लूस्कोनी के फोर्जा इटालिया को सीनेट में 13 से 16 सीटें जबकि प्रतिनिध सभा में 12.5 से 15.5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। पार्टी की साझेदार नॉर्थन लीग को सीनेट में 13 से 16 सीटें जबकि निचले सदन में 12 से 15.5 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी को पोल के मुताबिक, सीनेट में 4 से 6 सीटें जबकि निचले सदन में 3.5 से 5.5 सीटें मिलेंगी।

फाइव स्टार मूवमेंट (एम5एस) पार्टी सीनेट में 29 से 32 सीटें जीतती दिख रही है जबकि निचले सदन में उसे 29.5 से 32.5 सीटें मिल सकती हैं। एग्जिट पोल के मुताबिक, दक्षिणपंथी पार्टियों को 36 फीसदी वोट मिल सकते हैं। दक्षिणपंथी धड़ा सरकार बनाने के लिए एम5एस से बातचीत कर सकता है। एग्जिट पोल के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री मत्तेओ रेन्जी की डेमोक्रेटिक पार्टी 5 साल तक देश पर राज करने के बाद चुनाव हारती दिख रही है। आरएआई के पोल के मुताबिक, पीडी को सीनेट में 29-32 सीटें मिलती दिख रही है जबकि प्रतिनिधि सभा में 20-23 सीटें। बर्लूस्कोनी के स्वामित्व वाले मीडियासेट के एग्जिट पोल और स्काइटीजी24 के एग्जिट पोल के आंकड़े भी समान हैं।

हालांकि यदि दक्षिणपंथी पार्टियां चुनाव जीत भी जाती हैं तो धोखाधड़ी के मामले में सजायाफ्ता बर्लुस्कोनी चूंकी खुद प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने यूरोपीय संसद के अध्यक्ष एंतोनियो तजानी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया है। उम्मीद है कि नतीजे स्थानीय समयानुसार सोमवार शाम तक साफ हो जांगे। इस बार के चुनाव प्रचार में धुर दक्षिणपंथी दलों और फासीवाद विरोधी कार्यकर्ताओं के बीच काफी तनाव देखा गया था। चुनाव प्रचार पर प्रवासियों को लेकर डर और आर्थिक मुद्दे मुख्य रूप से हावी रहे।

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