1. Hindi News
  2. गैलरी
  3. देश
  4. Photos: मुगल बादशाह कुर्सी मेज पर बैठकर नहीं खाते थे, बिछता था दस्तरख्वान, जानें इसकी खासियत

Photos: मुगल बादशाह कुर्सी मेज पर बैठकर नहीं खाते थे, बिछता था दस्तरख्वान, जानें इसकी खासियत

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Jan 17, 2026 11:48 pm IST,  Updated : Jan 17, 2026 11:48 pm IST
मुगल बादशाह आलीशान महल में बड़े-बड़े खाने की मेज पर खाते थे। ऐसा नहीं है आपको जानकर हैरानी होगी कि मुगल बादशाह कभी भी टेबल और कुर्सियों पर बैठकर भोजन नहीं करते थे, उनके लिए दस्तरख्वान बिछाए जाते थे।
1/6 Image Source : freepik
मुगल बादशाह आलीशान महल में बड़े-बड़े खाने की मेज पर खाते थे। ऐसा नहीं है आपको जानकर हैरानी होगी कि मुगल बादशाह कभी भी टेबल और कुर्सियों पर बैठकर भोजन नहीं करते थे, उनके लिए दस्तरख्वान बिछाए जाते थे।
अब आपके जेहम में आएगा का मुगलों का दस्तरख्वान होता क्या था, तो बता दें कि यह एक खाने के लिए बिछाया गया जमीन पर फैला एक शाही कपड़ा होता था। इसके ऊपर गद्दे और कुशन रखे जाते थे, जिस पर बादशाह आराम से बैठकर खाना खाते थे।
2/6 Image Source : freepik
अब आपके जेहम में आएगा का मुगलों का दस्तरख्वान होता क्या था, तो बता दें कि यह एक खाने के लिए बिछाया गया जमीन पर फैला एक शाही कपड़ा होता था। इसके ऊपर गद्दे और कुशन रखे जाते थे, जिस पर बादशाह आराम से बैठकर खाना खाते थे।
दस्तरख्वान के बारे में जानकर हैरानी होगी कि ये सिर्फ एक साधारण कपड़ा नहीं होता था बल्कि यह रेशमी, मखमली या दमिश्क कपड़े का बना होता था। कभी-कभी इसपर सोने के धागों से कढ़ाई की जाती थी और इसके नीचे मोटा कालीन बिछाया जाता था ताकि शाही भोजन और भी आरामदायक और सुरक्षित हो। मुगल बादशाह बिना दस्तरख्वान बिछाए खाना नहीं खाते थे।
3/6 Image Source : freepik
दस्तरख्वान के बारे में जानकर हैरानी होगी कि ये सिर्फ एक साधारण कपड़ा नहीं होता था बल्कि यह रेशमी, मखमली या दमिश्क कपड़े का बना होता था। कभी-कभी इसपर सोने के धागों से कढ़ाई की जाती थी और इसके नीचे मोटा कालीन बिछाया जाता था ताकि शाही भोजन और भी आरामदायक और सुरक्षित हो। मुगल बादशाह बिना दस्तरख्वान बिछाए खाना नहीं खाते थे।
मुगल रोजाना कई तरह के व्यंजन खाते थे, इसमें कोरमा, कबाब, पुलाव, रोटियां और मीठे व्यंजन, ताजे और सूखे फल, अचार, भारतीय मसाले और कभी-कभी यूरोपीय व्यंजन शामिल होते थे। जहांगीर और शाहजहां के काल में आलू को अलग-अलग तरह से पकाकर दस्तरखान पर रखा जाता था। सबसे शानदार थाली बलिंदिर शाहजफर की मानी जाती थी।
4/6 Image Source : freepik
मुगल रोजाना कई तरह के व्यंजन खाते थे, इसमें कोरमा, कबाब, पुलाव, रोटियां और मीठे व्यंजन, ताजे और सूखे फल, अचार, भारतीय मसाले और कभी-कभी यूरोपीय व्यंजन शामिल होते थे। जहांगीर और शाहजहां के काल में आलू को अलग-अलग तरह से पकाकर दस्तरखान पर रखा जाता था। सबसे शानदार थाली बलिंदिर शाहजफर की मानी जाती थी।
मुगल बादशाहों का खाना स्वाद के साथ ही बेहद खास अंदाज में परोसा जाता था। थाली में हमेशा शानदार, रंग-बिरंगी और सोने-चांदी के बने पत्तों से सजी रहती थी। फलों को कई तरह के आकार में काटा जाता था। सूखे मेवे पुलाव में डालने से पहले चमकाए जाते थे। घी को रंगकर सुगंधित किया जाता था। दही कभी-कभी सात रंगों में परोसी जाती थी।
5/6 Image Source : freepik
मुगल बादशाहों का खाना स्वाद के साथ ही बेहद खास अंदाज में परोसा जाता था। थाली में हमेशा शानदार, रंग-बिरंगी और सोने-चांदी के बने पत्तों से सजी रहती थी। फलों को कई तरह के आकार में काटा जाता था। सूखे मेवे पुलाव में डालने से पहले चमकाए जाते थे। घी को रंगकर सुगंधित किया जाता था। दही कभी-कभी सात रंगों में परोसी जाती थी।
पनीर को विशेष तरीके से सजाया जाता था। जहांगीर के समय नूरजहां ने शाही खाने में कलात्मक सजावट को जोड़ा। रोज कई व्यंजन तैयार किए जाते थे। थाली में फलों और अचार का होना जरूरी था। ऐसा माना जाता था कि फलों से भूख बढ़ती है, पाचन बेहतर होता है।
6/6 Image Source : freepik
पनीर को विशेष तरीके से सजाया जाता था। जहांगीर के समय नूरजहां ने शाही खाने में कलात्मक सजावट को जोड़ा। रोज कई व्यंजन तैयार किए जाते थे। थाली में फलों और अचार का होना जरूरी था। ऐसा माना जाता था कि फलों से भूख बढ़ती है, पाचन बेहतर होता है।
Advertisement