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हार्ट ब्लॉकेज की जांच करने में यह टेस्ट है बेहद फायदेमंद? समय रहते करा लें टल जाएगा हार्ट अटैक का खतरा

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Nov 23, 2025 07:04 am IST,  Updated : Nov 24, 2025 03:31 pm IST

सही समय पर यह टेस्ट करवाने से हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इलाज अधिक सटीक तरीके से योजना बनाकर किया जा सकता है।

हार्ट ब्लॉकेज की जांच- India TV Hindi
हार्ट ब्लॉकेज की जांच Image Source : FREEPIK

हार्ट ब्लॉकेज एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय में विद्युत संकेत ठीक से नहीं पहुँच पाते, जिससे धड़कन धीमी या अनियमित हो जाती है। इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं। हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और वसा जमना या विद्युत संकेतों में बाधा।  68% हार्ट अटैक ब्लॉकेज के कारण होते हैं, और अगर ब्लॉकेज 30-40% के बीच हो तो मरीजों में हर साल हार्ट अटैक का जोखिम लगभग 15% तक बढ़ जाता है।सिद्ध हॉस्पिटल के चेयरमैन और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग मेहरोत्रा कहते हैं कि ऐसे में धमनियों की सही और गहरी जांच बेहद जरूरी हो जाती है। इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (IUVS) हृदय रोगों की पहचान में इस्तेमाल होने वाली एक आधुनिक तकनीक है।

क्यों है इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड?

डॉक्टर कहते हैं कि आमतौर पर हृदय की जांच के लिए एंजियोग्राफी की जाती है, लेकिन एंजियोग्राफी केवल धमनियों की छाया दिखाती है। इसके विपरीत, इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड धमनियों के भीतर की वास्तविक संरचना, प्लाक की मात्रा और ब्लॉकेज की गंभीरता को बेहद स्पष्ट रूप से दिखाता है। ये हार्ट ब्लॉकेज को ज़्यादा सटीक तरीके से पहचानने और उपचार का सही निर्णय लेने में मदद करती हैं।

कब किया जाता है इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड?

इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड ज़्यादातर एंजियोप्लास्टी के दौरान की जाती है। इसमें डॉक्टर एक पतली कैथेटर ट्यूब धमनी के अंदर डालते हैं, जिसके आगे एक छोटा अल्ट्रासाउंड सेंसर लगा होता है। यह सेंसर धमनी के भीतर घूमते हुए लाइव तस्वीरें दिखाता है। इन तस्वीरों से डॉक्टर आसानी से समझ पाते हैं कि ब्लॉकेज कितना फैला है, प्लाक नरम है या कठोर, और स्टेंट लगाने के लिए किस साइज और लंबाई का स्टेंट सही रहेगा। इसी से यह भी पता चलता है कि पहले से लगाया गया स्टेंट ठीक से खुला है या नहीं।  यह सिर्फ ब्लॉकेज दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि ब्लॉकेज कितना गंभीर है और उसका इलाज किस तरह किया जाना चाहिए। 

हार्ट की जांच के लिए ये टेस्ट भी हैं फायदेमंद:

हार्ट की जांच के लिए एंजियोग्राफी , ट्रेडमिल टेस्ट, होल्टर मॉनिटरिंग और ECG जैसी अन्य जांचें भी की जाती हैं। इनसे दिल की कार्यप्रणाली, धड़कन और ब्लड फ्लो से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है, जिससे ब्लॉकेज या अन्य हृदय समस्याओं का पता लगाने में आसानी होती है। जब दिल की धमनी में रुकावट महसूस होती है, तो सिर्फ़ ब्लॉकेज कितना है यह जानना ही काफी नहीं होता। यह भी समझना जरूरी है कि प्लाक नरम है या कठोर, सतह चिकनी है या फटी हुई है, क्योंकि अस्थिर प्लाक ही अक्सर हार्ट अटैक का कारण बनते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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