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Lockdown: आगरा में ऐतिहासिक स्थल बंद होने से करीब 3500 गाइड घर बैठने को मजबूर

कोरोना को लेकर एहतियात बरतते हुए सरकार ने बीते 17 मार्च को ही आगरा के ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, आगर फोर्ट अन्य पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया था। ऐसे में गाइड्स का काम ठप है और इस समय उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

Reported by: IANS
Published : May 05, 2020 09:42 pm IST, Updated : May 05, 2020 09:42 pm IST
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आगरा में ऐतिहासिक स्थल बंद होने से करीब 3500 गाइड घर बैठने को मजबूर

आगरा: पूरे देश में इस वक्त कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं शुरुआत में ही इसे लेकर एहतियात बरतते हुए सरकार ने बीते 17 मार्च को ही आगरा के ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, आगर फोर्ट अन्य पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया था। ऐसे में गाइड्स का काम ठप है और इस समय उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन आगरा के प्रेसिडेंट संजय शर्मा ने बताया, "कोरोना वायरस की वजह से सभी व्यापार पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन अगर हम पर्यटन या गाइड की बात करें तो इस क्षेत्र पर काफी प्रभाव पड़ा है क्योंकि ये सीजनल बेसिस पर होता है। पर्यटक एक साल पहले से ही अपी यात्रा को बुक कर देते हैं।"

उन्होंने कहा, "पर्यटन पर अप्रैल 2021 तक प्रभाव रहेगा और मेरे विचार से सितंबर या अक्टूबर 2021 तक यह वापस पटरी पर आ पाएगा, क्योंकि अक्टूबर से मार्च तक ही इसका सीजन होता है और पर्यटकों ने अपनी बुकिंग कैंसिल कर दी हैं। पर्यटक घबराए हुए हैं। पेनिक सिचुएशन में हैं। लोग अपने घरों से ही बाहर नहीं निकल रहे हैं तो दूसरे देश घूमने क्यों जायेंगे।" उन्होंने कहा, "रीजनल लेवल के गाइड्स को पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय से लाइसेंस मिलता है जिनकी संख्या करीब 3500 से 4000 तक है। आगरा में जो रीजनल गाइड है उनकी संख्या 469 है।"

उन्होंने बताया, "पर्यटन 6 महीने का होता है और जिन गाइड के पास लाइसेंस है वो ऑफ सीजन कुछ और जॉब नहीं कर सकते यानी कि इस वक्त हमारे पास कोई और ऑप्शन नहीं है, क्योंकि हमारा जब लाइसेंस बनता है तो उसमें बहुत सारी शर्ते होती हैं जिसके तहत हम कोई और नौकरी नहीं कर सकते।"

उन्होंने बताया, "जितने भी रीजनल गाइड हैं, वह सभी इस वक्त डिप्रेस हैं, क्योंकि उनके पास कोई और चारा नहीं है। हमने प्रधानमंत्री, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय को अपनी समस्या को लेकर पत्र भी लिखे हैं, लेकिन अभी तक हमें कोई जवाब नहीं आया है।" उन्होंने बताया, "पर्यटन मंत्रालय की तरफ से हमारे पास कोई बैकअप नहीं होता ना ही हमें पेंशन मिलती है। ना ही हमारा इंश्योरेंस होता है।''

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