Friday, January 23, 2026
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"क्या मैं अपनी पूंछ दबाकर बैठा रहूंगा? इनका नाम नहीं ले पाऊंगा" उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, जानें और क्या कहा

मैं 'नालायक' के रूप में इस पीढ़ी में या इस परिवार में जन्मा हूं, यह कलंक मैं अपने माथे पर कभी नहीं लगने दूंगा। उद्धव ठाकरे ने बड़ा बयान दिया है, जानें उन्होंने किस पर तंज कसा और क्या क्या कहा?

Reported By : Sachin Chaudhary Edited By : Kajal Kumari Published : Jan 23, 2026 10:41 pm IST, Updated : Jan 23, 2026 10:41 pm IST
उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान- India TV Hindi
Image Source : REPORTER उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान

उद्धव ठाकरे ने आज बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “मैं इनका नाम नहीं ले पाऊंगा। मैं 'नालायक' के रूप में इस पीढ़ी में या इस परिवार में जन्मा हूं, यह कलंक मैं अपने माथे पर कभी नहीं लगने दूंगा। जिस परिवार ने मुंबई के लिए… मेरे दादा 'प्रबोधनकार', जो संयुक्त महाराष्ट्र के पहले पांच सेनापतियों (शिलिदारों) में से एक थे, जिन्हें लोग 'शेलार मामा' कहते थे। वे ही संयुक्त महाराष्ट्र समिति को एक साथ लाए थे। मुंबई के लिए जिस मराठी व्यक्ति ने अपना खून बहाया और उस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले 'प्रबोधनकार' का पोता होने के नाते, यदि मुंबई के टुकड़े मेरी आंखों के सामने ये 'हरामखोर' व्यापारी कर रहे हों, तो क्या मैं अपनी पूंछ दबाकर बैठा रहूंगा?"

उद्धव का बड़ा आरोप

मैं यह सब किसी पर दोष मढ़ने (ठीकरा फोड़ने) के लिए नहीं कह रहा हूं। लेकिन क्या इसे लोकतंत्र कहना चाहिए? क्या इसे लोकतंत्र मानना चाहिए? जिस तरह से मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की गई। जिस तरह से मतदान केंद्रों पर कुछ जगहों पर धांधली हुई। और यदि हमने समय रहते दुबार मतदाता (Duplicate Voters) खोजकर नहीं निकाले होते, तो मुंबई के चुनाव परिणाम और भी खराब हो सकते थे।"

जो कुछ भी होना है, वह तुरंत (उसी जगह पर) होना चाहिए। 'जय महाराष्ट्र' कहना आज से जोर-शोर से शुरू करें। एक-दूसरे से मिलने के बाद... अरे, हम भी 'जय जय रघुवीर समर्थ' बोलने वाले समर्थ रामदास भी तो हमारे ही थे न? मनाचे श्लोक (मन के श्लोक) उन्होंने ही हमें सिखाए।

हम हमेशा लड़ते रहेंगे

महाराष्ट्र में जितने हिंदुत्व को मानने वाले साधु-संत हुए, उतने शायद ही किसी अन्य प्रांत में हुए होंगे। अगर हुए भी हैं, तो यह खुशी की बात है। लेकिन हमें जितनी संस्कृति, एक सांस्कृतिक इतिहास और संस्कार मिले हैं, उसके कारण हमें किसी से संस्कार सीखने की कोई जरूरत नहीं है, खासकर हिंदुत्व सीखने की तो बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। हमें यह मत सिखाएं कि कैसे लड़ना है, क्योंकि हमारे खून में ही लड़ना है और हम हमेशा से लड़ते ही आए हैं।"

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