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ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होकर बुरे फंसे शहबाज-मुनीर, पाकिस्तान में मचा भारी बवाल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर अपने ही देश में गाजा के मुद्दे पर घिर गए हैं। ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर विपक्ष समेत देश के आम लोग शहबाज और मुनीर की बगावत पर उतर आए हैं।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Jan 23, 2026 10:33 pm IST, Updated : Jan 23, 2026 10:33 pm IST
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर। - India TV Hindi
Image Source : AP पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर।

इस्लामाबाद/दावोस: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के चार्टर पर हस्ताक्षर करके बड़ी आफत मोल ले ली है। शहबाज के इस कदम के बाद पाकिस्तान में भारी बवाल मच गया है। पाकिस्तान का विपक्ष समेत आम लोग शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर को ट्रंप का चाटुकार बताकर भारी विरोध दर्ज करा रहे हैं। 

ट्रंप ने क्यों बनाया 'बोर्ड ऑफ पीस'

यह बोर्ड मूल रूप से गाजा में युद्धविराम और पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसका दायरा वैश्विक संघर्षों को सुलझाने तक बढ़ा दिया गया है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन हैं, और इसमें पाकिस्तान सहित UAE, हंगरी, कोसोवो, पराग्वे, मोरक्को जैसे 19 देशों के नेता शामिल हुए हैं। हालांकि, इस कदम ने पाकिस्तान में राजनीतिक, धार्मिक और जन स्तर पर जबरदस्त विरोध पैदा कर दिया है। दावोस में 22 जनवरी को हुए साइनिंग सेरेमनी में शहबाज शरीफ ने ट्रंप के साथ हाथ मिलाया और फोटो खिंचवाई। पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय ने इसे गाजा में स्थायी शांति और फिलिस्तीनियों की मदद के लिए एक कदम बताया। 

पाकिस्तान ने कहा-शांति को समर्थन का हिस्सा

पाक विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि शहबाज का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत गाजा शांति योजना को समर्थन देने का हिस्सा है। शहबाज सरकार के मंत्री अहसन इकबाल ने घरेलू विरोधियों को "नासमझ" करार देते हुए कहा कि इस बोर्ड में शामिल होने से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय इज्जत बढ़ेगी और फिलिस्तीनियों को बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता मिलेगी,, लेकिन पाकिस्तान में सत्ताधारी गठबंधन के इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। 

विपक्ष ने शहबाज-मुनीर को घेरा

पाकिस्तान के विपक्षी दलों, इस्लामी संगठनों और पूर्व सांसदों ने शहबाज-मुनीर के इस फैसले को "इस्लाम के सिद्धांतों से समझौता"  और "ट्रंप की खुशामद" करार दिया है। जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फज्लुर रहमान ने संसद में कहा कि शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ट्रंप की चापलूसी में इतने मशगूल हैं कि उन्होंने इस्लाम के उसूल भुला दिए। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के लोग इसे कभी माफ नहीं करेंगे।"इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने भी तीखा हमला बोला। PTI नेता शहरयार अफरीदी ने कहा कि शहबाज-मुनीर की जोड़ी ने बोर्ड पर साइन करके मुल्क की इज्जत मिट्टी में मिला दी। PTI ने इसे "अवाम के जज्बातों की अनदेखी" और "ट्रंप के सामने मुल्क को गिरवी रखने" जैसा बताया। 

मुनीर-शहबाज ने पाकिस्तान को दिया धोखा

पूर्व सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने इसे "राष्ट्रीय धोखा" करार दिया। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर भी आक्रोश है। पत्रकार इमरान रियाज खान ने कहा कि जो लोग इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि अब पाकिस्तान के लोग किस मुंह से इस्लाम की बात करेंगे। कई इस्लामी संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा रहा है और हमास को समर्थन दिया है, लेकिन अब शहबाज शरीफ ने "फिलिस्तीनियों के कातिलों" के साथ बैठकर समझौता कर लिया। कुछ लोगों ने इसे "इजरायल के साथ खड़े होने" के रूप में देखा, क्योंकि बोर्ड ट्रंप के गाजा प्लान का हिस्सा है, जो 2020 के "पीस टू प्रॉस्पेरिटी" प्लान से जुड़ा माना जाता है-जिसका पाकिस्तान ने पहले विरोध किया था।

बोर्ड में पाकिस्तन की हैसियत जीरो

विपक्षी नेता राजा नासिर अब्बास ने सवाल उठाया कि बोर्ड में पाकिस्तान की क्या हैसियत होगी? क्या शहबाज शरीफ ट्रंप से पूछ सकते हैं कि वे लाइफटाइम चेयरमैन कैसे बने? कई विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी और अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश के चलते यह कदम उठाया गया, लेकिन घरेलू स्तर पर यह राजनीतिक सुसाइड साबित हो सकता है। ट्रंप ने दावोस में बोर्ड को "वैश्विक शांति का नया मंच" बताया और कहा कि "सब इसमें शामिल होना चाहते हैं।" बोर्ड का लोगो UN प्रतीक से मिलता-जुलता है, लेकिन सोने का रंग और अमेरिका-केंद्रित डिजाइन होने से यूरोपीय देशों ने आलोचना की। 

भारत-चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने नहीं लिया हिस्सा

ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में कई बड़े देश जैसे भारत, चीन, यूके, फ्रांस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। इससे पाकिस्तान में विवाद हो गया है। पाकिस्तान के लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या शहबाज सरकार पीछे हटेगी या विरोध को दबाएगी? फिलहाल, गाजा मुद्दे पर पाकिस्तान की विदेश नीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है, जो घरेलू राजनीति को हिला सकता है।

पाकिस्तान गाजा में भेजेगा हमास के खिलाफ सैनिक

ट्रंप के निर्देश पर पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर 400 पाकिस्तानी सैनिक गाजा भेजेंगे। इन सैनिकों को हमास को निरस्त्रीकरण करने में इस्तेमाल किया जाएगा। इन सैनिकों को इजरायल भारी-भरकम वेतन देगा। एक तरह से पाकिस्तान के ये सैनिक हमास के खिलाफ इजरायल की मदद करेंगे। इससे पाकिस्तान में भारी बवाल हो रहा है। 

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