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इंदौर में जहां दूषित पानी से हुई 16 मौतें, वहां के पार्षद को मिला था 'बेस्ट' का अवॉर्ड, देखें Video

 Reported By: Anurag Amitabh Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jan 07, 2026 09:34 am IST,  Updated : Jan 07, 2026 12:38 pm IST

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 मौतों के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस पार्षद पर लापरवाही के आरोप हैं, उसे कुछ महीने पहले मेयर ने ‘बेस्ट पार्षद’ का अवॉर्ड दिया था। पुराना वीडियो वायरल होने से प्रशासनिक दावों पर सवाल उठे हैं।

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इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कमल वाघेला को अवॉर्ड दिया था। Image Source : REPORTER INPUT

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 16 लोगों की मौत के मामले पर नई परतें खुलने लगी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस बीजेपी पार्षद कमल वाघेला पर दूषित पानी की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप है, उसी को इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कुछ महीने पहले सार्वजनिक मंच से 'बेस्ट पार्षद' का अवॉर्ड दिया था। अब वह पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जो मेयर के दावों की पोल खोल रहा है। वीडियो में मेयर पार्षद की तारीफों के पुल बांध रहे हैं और दूसरे पार्षदों को उनसे सीखने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन हकीकत में ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन का काम अधूरा होने की वजह से लोग जहरीला पानी पीने पर मजबूर हुए और मौतें हुईं।

मेयर ने की थी पार्षद कमल वाघेला की तारीफ

वायरल हो रहा वीडियो नगर निगम परिषद के सदस्यों के 3 साल पूरे होने पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम का है। इसमें मेयर पुष्यमित्र भार्गव मंच से बोल रहे हैं, जबकि उनके पीछे पार्षद कमल वाघेला खड़े हैं। पार्षद की तारीफ करते हुए मेयर कहते हैं, 'यह हैं कमल वाघेला। इनके नाम में कमल भी है, मतलब कोमल हैं और वाघ भी है, मतलब ज्यादा कोई परेशान करता है तो शेर हो जाते हैं। जो परेशान करने वाले हैं, वे जरा ठीक से समझ लें कि ज्यादा परेशान करेंगे तो ठीक कर देंगे। कमल जी संगठन के आदमी हैं, महामंत्री रहे हैं। 24 सड़कें उन्होंने बना दी हैं इस वार्ड में। इन 24 सड़कों में पहले ड्रेनेज की लाइन डाली, फिर पानी की लाइन डाली।'

'भागीरथपुरा आकर काम देखना चाहिए'

इंदौर के मेयर ने वीडियो में पार्षद की तारीफ करते हुए आगे कहा, 'एक सड़क को बनाने का खर्चा कम से कम 10 लाख, तो 2 करोड़ 40 लाख की तो सड़कें हो गईं। इतने की ही पानी की और ड्रेनेज की लाइन डली है। तो एक पार्षद ने अपने 3 साल के कार्यकाल में 10 करोड़ के काम करवा दिए। अच्छा काम करने का सर्टिफिकेट मैं मेयर होने के नाते उनको देता हूं और बधाई देता हूं। बाकी सब पार्षदों से भी कहूंगा, जिनके क्षेत्र में बस्तियां आती हैं, उनको भागीरथपुरा आकर देखना चाहिए कि कैसे काम हुआ। यह हमेशा अपने काम के लिए मुझे फॉलो करते रहते हैं, परेशान करते रहते हैं, चिंतित करते रहते हैं, लेकिन मैंने आजतक इनका कोई काम नहीं रोका।'

'शुरू से सिस्टम कोलैप्स था, सिस्टम में कमी थी'

वीडियो में मेयर क्षेत्र की जनता को बता रहे हैं कि भागीरथपुरा में 2 करोड़ 40 लाख की 24 सड़कों के अलावा इतने ही पैसों के ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन डल चुकी है। लेकिन 16 लोगों की मौत के बाद हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। इंडिया टीवी से बातचीत में पार्षद कमल वाघेला ने खुद कहा था, 'शुरू से सिस्टम कोलैप्स था, सिस्टम में कमी थी। ड्रेनेज का पानी पाइपलाइन में, पाइपलाइन का पानी ड्रेनेज में मिल रहा था।' सवाल उठता है कि अगर 2.40 करोड़ की ड्रेनेज और 2.40 करोड़ की पाइपलाइन डल चुकी थी, तो फिर लोगों ने क्यों और कैसे जहर वाला पानी पिया? कागजों में करोड़ों खर्च दिखाए गए, लेकिन हकीकत में लीकेज और लाशें ही नजर आईं।

पुराने वीडियो से सामने आया मेयर का झूठ?

मौतों के बाद मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने आरोप लगाए थे कि अफसर उनकी नहीं सुनते, लेकिन कहा जा रहा है कि पुराने वीडियो से उनका झूठ भी सामने आ गया। सवाल उठ रहे हैं कि अगर अफसर नहीं सुनते, तो मंच से काम का सर्टिफिकेट किस आधार पर दे रहे थे? सच्चाई यह है कि 2022 में स्वीकृत 2 चरणों के काम में से पहले चरण का 60 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ, और दूसरे चरण का टेंडर 30 दिसंबर को पास हुआ। 4 मौतों के बाद 31 दिसंबर को 2 करोड़ 40 लाख के पानी और ड्रेनेज की पाइपलाइन के टेंडर का वर्क ऑर्डर साइन हुआ। मेयर ने महीनों पहले मंच से विकास का दावा किया था, लेकिन जमीन पर सीवेज का सच कुछ और है। वायरल वीडियो ने सिस्टम को उधेड़ कर रख दिया है।

वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा

सवाल है कि पुष्यमित्र भार्गव ने 2 करोड़ 40 लाख की मदद से पानी की पाइपलाइन बनवाने और इतने ही पैसों से ड्रेनेज लाइन बनवाने का श्रेय भागीरथपुरा वार्ड के पार्षद कमल वाघेला को कैसे दे दिया था, जबकि खुद वाघेला कह रहे थे कि सिस्टम कोलैप्स था, ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन एक-दूसरे से मिल रही थीं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों वाले पार्षद को मिले मेयर से बेस्ट पार्षद के अवॉर्ड की हकीकत बयां कर रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा है कि कागजों पर करोड़ों के काम दिखाए गए, लेकिन असल में सिस्टम फेल था। इसके साथ ही मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।

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