इसरो अपने बेहद महत्वपूर्ण मिशन चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च करने जा रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता इसरो के लिए बेहद अहम साबित होगी। इससे पहले चंद्रयान-2 का लैंडर चंद्रमा की सतह पर नहीं उतर पाया था।
दो दिन बाद यानी 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3(Chandrayaan-3) की लॉन्चिंग होगी। ऐसे में आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताएंगे कि आखिर हमारी पृथ्वी से मून तक की दूरी कितनी है।
इसरो अपने चंद्रयान-3 मिशन की लॉन्चिंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। 14 जुलाई को श्रीहरीकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे लॉन्च किया जाएगा।
चांद की सतह पर कदम रखने वालों के बारे में आपको तो पता ही होगा। चांद पर पहली बार नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कदम रखा था। जिसके बाद कई लोगों ने चांद पर अपना कदम रखा। उनमें से दो लोगों का चांद पर कदम रखने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
लॉन्च के लिए तैयार चंद्रयान-3...PSLV-MK3 रॉकेट के साथ जोड़ा गया... इसरो ने जारी किया श्रीहरिकोटा में चंद्रयान-3 मिशन की तैयारियों का वीडियो...13 जुलाई को हो सकता है चंद्रयान-3 का लॉन्च
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी कि ISRO ने चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के लिए तारीख और समय का एलान कर दिया है।
इसरो 12 से 19 जुलाई के बीच अपने चंद्रयान मिशन को प्रक्षेपित कर सकता है। इस बात की जानकारी इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने दी है।
2013 में भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन के सफल लॉन्च के अलावा, भारत ने चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 के नाम से जाने जाने वाले अपने मिशन को चंद्रमा पर भेजने का दो बार प्रयास किया है। चंद्रमा के लिए तीसरा उपग्रह मिशन, चंद्रयान-3 अगले साल लॉन्च किया जाएगा।
ISRO: इसरो ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में हाल में प्रकाशित एक अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार चंद्रयान-2 ने पहली बार क्लास (चंद्रयान-2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेट्रोमीटर) का इस्तेमाल कर चंद्रमा पर प्रचुर मात्रा में सोडियम की मौजूदगी का पता लगाया है।
चंद्रयान-2 मिशन के लगभग 2 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस साल अगस्त महीने में चंद्रयान -3 मिशन को लांच करेगा। इस बात बात की जानकारी भारतीय अंतरिक्ष विभाग ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में दी है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने चंद्रमा के कक्ष में चंद्रयान-2 के दो वर्ष पूरा करने के उपलक्ष्य में सोमवार को चंद्र विज्ञान कार्यशाला 2021 का उद्घाटन किया।
इसरो के चंद्रयान-2 मिशन के ऑर्बिटर की मदद से चांद की नई जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं। अब पता चला है कि चांद की सतह पर हाइड्रॉक्सिल और वाटर मॉलिक्यूल्स (पानी के अणु) मौजूद हैं।
चंद्रयान-3 के 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान सामान्य कामकाज को मानकर लॉन्च किए जाने की संभावना है।
भारत के दूसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-2 के आज बुधवार (22 जुलाई) को अपने प्रक्षेपण के एक साल पूरा करने के अवसर पर इसरो ने कहा है कि इसके सभी आठ उपकरण बखूबी काम कर रहे हैं।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने चंद्रयान मिशन 2 को लेकर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इसरो को चांद जैसी मिट्टी बनाने की तकनीक का पेटेंट मिल गया है।
ISRO चीफ के शिवन ने यह भी बताया कि चंद्रमा की सतह पर उतरने के अगले प्रयास चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो चुका है और यह प्रोजेक्ट तेजी से चल रहा है
प्रधानमंत्री ने चंद्रयान कार्यक्रम का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने चंद्रयान मिशन की बात करते हुए कहा कि असफलता भी हमें सफलता की शिक्षा देती है।
इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा है कि तीसरे चंद्रयान मिशन को सरकार की मंजूरी मिल गई है और इससे संबंधित सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं।
आखिर ऐसी क्या तकनीकी खामी आई थी जिस वजह से लैंडर विक्रम इतिहास रचने से चूक गया था? बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के शिवन ने इसके बारे में जानकारी दी
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत 2020 में चंद्रयान-3 को लांच करेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान पर चंद्रयान-2 से भी कम लागत आएगी।
संपादक की पसंद