अमेरिका ने साल 2025 में अपनी व्यापार पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए तमाम देशों पर पारस्परिक टैरिफ लागू कर दिया था, जो आज भी लागू है। इसका दुनियाभर में असर देखने को मिला।
ट्रंप ने दावा भी किया प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है, और अब भारत अमेरिका से बहुत अधिक तेल खरीदने पर भी विचार करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का खुद उन्हीं के देश में विरोध भी हो रहा है। खास बात यह है कि किसी देश द्वारा जिस रूसी तेल की खरीद पर ट्रंप हो हल्ला मचा रहे हैं, खुद अमेरिका भी उसका खरीदार है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि टैरिफ पॉलिसी की वजह से अमेरिका न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी उसकी स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैक्स और अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों में तनाव ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को प्रभावित किया है। भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में इस वृद्धि और गिरावट का एक बड़ा असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
जिन देशों का नाम इस सूची में नहीं है, उन पर 10 प्रतिशत की डिफॉल्ट टैरिफ दर लागू होगी। सबसे अधिक टैरिफ दरें पाने वाले देशों में सीरिया (41%), स्विट्जरलैंड (39%), लाओस और म्यांमार (40%), इराक और सर्बिया (35%), और लीबिया तथा अल्जीरिया (30%) शामिल हैं।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा का बाजार पर जोरदार असर देखा जा रहा है। निवेशकों में टैरिफ को लेकर चिंता का माहौल है।
जानकार कहते हैं कि ज्यादा टैरिफ के चलते भारत से आईफोन निर्यात पर ज्यादा लागत का सीधा प्रभाव पड़ेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में मांग घट सकती है और एप्पल को अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन दोबारा व्यवस्थित करनी पड़ सकती है।
हाल के सप्ताहों में ट्रंप लगातार यह संकेत देते आ रहे थे कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता जल्द हो सकता है, जिससे उम्मीद बनी थी कि 1 अगस्त से पहले समझौता हो जाएगा। लेकिन अब तक न तो कोई ठोस निर्णय हुआ है, जिससे व्यापारिक हलकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि जापान अपने देश को कार, ट्रक, चावल और अन्य कृषि उत्पादों सहित कई चीजों के व्यापार के लिए खोल देगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने बताया कि यह समझौता सैंकड़ों हजारों नौकरियां पैदा करेगा।
ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि जिन देशों के सामानों पर इन दरों पर टैक्स लगाया जाएगा, वे अफ्रीका और कैरिबियन के होंगे, जो आम तौर पर अमेरिका के साथ अपेक्षाकृत कम स्तर का व्यापार करते हैं।
अमेरिका ने कनाडा की वस्तुओं पर पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। फिर बाद में ट्रम्प ने अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच हुए 2020 के व्यापार समझौते के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स को इससे छूट दे दी थी।
अमेरिका ने इससे पहले 2 अप्रैल को, भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाया था, लेकिन इसे 9 जुलाई तक 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया था। अब इसे 1 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया है।
ट्रंप के दिमाग में क्या चल रहा है ? क्या ट्रंप बीजिंग पर बम गिरा देते ? क्या ट्रंप मॉस्को पर हमला कर देते ? ट्रंप..भारत के दोस्त या दुश्मन ? ट्रंप के सनसनीखेज़ ऑडियो में क्या है ? ट्रंप हर किसी को धमकी क्यों देते हैं ? क्या ट्रंप की बात को सीरियसली लेना चाहिए ?
यह अनाउंसमेंट लंदन में ट्रम्प के बड़े आर्थिक अधिकारियों की उनके चीनी समकक्षों के साथ बैठक के बाद की गई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यह बैठक अमेरिकी पक्ष के अनुरोध पर हो रही है, जिसको लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने असहमति जताई और जियान से कहा कि वापस जाकर अपनी फाइलों का अध्ययन करें।
राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के एलान के बाद से दुनिया भर के बाज़ार में उथल पुथल जारी
पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिकी व्यापार नीति में चल रहे बदलावों से घरेलू विकास पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं है।
व्हाइट हाउस के दस्तावेजों में भारत पर 27 प्रतिशत शुल्क दिखाया गया था। हालांकि, नवीनतम अपडेट के अनुसार, इसे घटाकर 26 प्रतिशत कर दिया गया है।
भारत ने अमेरिका के साथ बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार के लिए कारों, रसायनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के आयात में बड़ी टैरिफ कटौती का संकेत दिया है।
संपादक की पसंद