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कैंसर मरीज को कीमोथेरेपी के लिए HR ने नहीं दी छुट्टी, गुस्से में उठाया ऐसा कदम; सुनकर रूह कांप जाएगी

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jan 29, 2026 07:02 pm IST,  Updated : Jan 29, 2026 07:02 pm IST

Ajab Gajab: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा केस चर्चा में आया है जिसे सुनने के बाद हर कोई आलोचना कर रहा है। इस केस में कीमोथेरेपी को कर्मचारी को छुट्टी नहीं मिलने का दावा किया जा रहा है।

निराश कर्मचारी। - India TV Hindi
निराश कर्मचारी। Image Source : FREEPIK

Ajab Gajab: ऑफिस में काम का अत्यधिक दबाव, बर्नआउट, खराब वर्क-लाइफ बैलेंस, टॉक्सिक माहौल और काम के बदले कम सैलरी के कारण ज्यादातर कर्मचारी निराश रहते हैं। वहीं, शारीरिक तनाव और मानसिक तनाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन जन्म लेता है। मगर, इन दिनों जिस शख्स की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है उसके साथ ये विषाक्तता की सारी हदें पार हो गईं। दरअसल, दावा किया गया है कि, अमेरिका स्थित सोशल मीडिया पेशेवर टायलर वेल्स ने एक विज्ञापन एजेंसी में अपनी लाखों की नौकरी छोड़कर फ्रीलांस काम शुरू करने की घोषणा की। अपने पोस्ट में वेल्स ने बताया कि उन्हें 2024 में ब्रेन कैंसर का पता चला था। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें न तो समझ मिली और न ही सहयोग, बल्कि कार्यस्थल की नीति की कठोर व्याख्या की गई, जिसके कारण उनके पास नौकरी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 

एक्स पर बयां किया दर्द 

एक्स पर पोस्ट को @tylerdw नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में लिखा कि 'उनके कार्यस्थल पर असीमित सवैतनिक अवकाश की सुविधा थी। लेकिन जब कीमोथेरेपी शुरू हुई, तो यह नीति अपने आप में बेमानी हो गई। मुझे बताया गया कि कीमोथेरेपी के दौरान मैं हर महीने उस सवैतनिक अवकाश का उपयोग नहीं कर सकता क्योंकि इसे सवैतनिक अवकाश नीति का दुरुपयोग माना जाएगा।' उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब 'साल भर में हर महीने 2-3 दिन की छुट्टी' ही होगी। इसके बजाय, उन्होंने कहा, उन्हें बिना वेतन के FMLA लेने की सलाह दी गई थी। वेल्स ने लिखा, 'कल्पना कीजिए कि कीमोथेरेपी करा रहे किसी मरीज से कहा जाए कि जब वह कीमोथेरेपी के कारण बीमार महसूस कर रहा हो तो वह अपनी असीमित अवकाश का उपयोग नहीं कर सकता। ऐसा हुआ था।' उन्होंने आगे बताया कि डॉक्टरों के समर्थन से अस्थायी रूप से काम का बोझ कम करने के लिए प्रस्तुत किए गए उनके अनुरोध को HR विभाग ने अस्वीकार कर दिया। वेल्स के अनुसार, 'बीमार लोग पहले से ही बहुत सी चीजों को लेकर चिंतित हैं। हमें बिलों के भुगतान की चिंता नहीं करनी चाहिए।' 

कानून की उठाई मांग 

पोस्ट में वेल्स ने कहा कि वे कार्यस्थलों पर गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के साथ होने वाले व्यवहार में सुधार के लिए प्रयास जारी रखेंगे और कीमोथेरेपी और कैंसर के इलाज के दौरान पूर्ण वेतन की गारंटी देने वाले कानूनों की मांग करेंगे। उन्होंने लिखा, 'इसमें से कुछ नीतिगत है, कुछ स्वास्थ्य संबंधी सुधार हैं। लेकिन यह सब लोगों को प्राथमिकता देने के बारे में है।' उन्होंने पोस्ट का समापन लोगों से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए लाइक, कमेंट या शेयर करने का अनुरोध करते हुए किया।

यूजर्स ने शेयर किए एक्सपीरिएंस 

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई यूजर्स ने कैंसर से जूझते हुए अपने अनुभवों को साझा किया। एक यूजर ने लिखा, 'मैं कैंसर का इलाज करवा रहा हूं… मैं अक्सर लोगों को कीमोथेरेपी के दौरान काम करते देखता हूं। यह बहुत दुखद है।' दूसरे ने लिखा कि, 'मैंने एक साल तक कीमोथेरेपी के दौरान काम किया… हम बिना वेतन के FMLA (फैमिली मेडिकल लीव एग्रीमेंट) लेने का जोखिम नहीं उठा सकते।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'कीमोथेरेपी के दौरान मैं बेघर हो गया था क्योंकि मुझे कोई मदद नहीं मिल पा रही थी।'  

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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