Interesting Facts : अपने जीवन में हम सभी को सुविधाओं की ऐसी आदत लग चुकी है कि बिना मशीनों के बिना जीवनयापन करना असंभव लगने लगता है। घरों में एसी से फ्रिज तक और हीटर से गीजर तक ऐसी चीजों की लंबी लिस्ट है जिनके बिना जीवनयापन संभव ही नहीं है। ये सभी चीजें आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इतनी बुनियादी जरूरत बन चुकी हैं कि मानो इनका न होना जीवन प्रत्याशा यानी Life Expectancy को प्रभावित करेगा। अगर फ्रिज की ही बात करें तो गृहस्थी में अकेले इसकी ही बड़ी भूमिका होती है। फ्रिज के होने से ठंडा पानी, बर्फ और फल-सब्जियों को स्टोर करना आसान हो जाता है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि, जब फ्रिज नहीं थे तब बर्फ कैसे बनाई जाती थी ?
रेगिस्तान में बनाई गई आकृतियां
अटलांटिक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में रेगिस्तान में पाई जाने वाली प्राचीन बर्फ बनाने के तरीकों के बारे में बताया गया है। दावा है कि, फारसी लोगों ने यखचल बनाए थे जिनको बर्फ के गड्ढे भी कहा जा सकता है। ये यखचल 400 ईसा पूर्व के हैं। ईरान के शुष्क भूभाग में आज भी ये 20 मीटर ऊंचे गुंबद मौजूद हैं। गुंबदनुमा यखचल का उपयोग न केवल बर्फ के भंडारण के लिए किया जाता था, बल्कि बर्फ के निर्माण के लिए भी किया जाता था। ये केवल भंडारण इकाइयां नहीं थीं बल्कि ये बिजली के आविष्कार से सदियों पहले काम करने वाले परिष्कृत, टिकाऊ रेफ्रिजरेटर थे।
रेगिस्तान में ऐसे जमाते थे बर्फ
रिपोर्ट के मुताबिक, यखचलों में जमीन के ऊपर का हिस्सा एक मोटा, शंकु के आकार का गुंबद होता है, जिसकी ऊंचाई अक्सर 10 से 18 मीटर होती है। इनको रेत, मिट्टी, चूना, राख, बकरी के बाल और अंडे की सफेदी ये बनाया जाता था। इसकी दीवार 2 मीटर मोटी, ऊपर की ओर पतली होती दीवारों से गर्म हवा ऊपर उठकर बाहर निकल जाती थी जबकि ठंडी हवा नीचे ही रहती थी। इससे जिससे गुंबद के अंदर का तापमान बना रहता था। गर्म महीनों में भी इसका आंतरिक भाग ठंडा रहता था। गुंबद के पास पत्थर से बने उथले तालाब थे। सर्दियों की रातों में इन तालाबों में पानी डाला जाता था। कम नमी, साफ आसमान के कारण आसपास का तापमान हमेशा शून्य से नीचे न गिरने के बावजूद, पानी रात भर में जम जाता था। एक और तरीका भी अपनाया जाता था जिसमें तालाबों की सतह का पानी रात में ठंडा होता था जिससे हवा का तापमान ज्यादा होने पर भी बर्फ जमने लगती थी। इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराने से बर्फ की मोटी परतें बन जाती थीं, जिन्हें तोड़कर गड्ढे में जमा कर लिया जाता था।
भारत में बिना फ्रिज कैसे जमाते थे बर्फ
भारत में बर्फ बनाने के तरीकों की कुछ जानकारी encyclopedia में मिलती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 17वीं शताब्दी में हिमालय से बर्फ आयात की जाती थी, लेकिन इसके महंगे होने के कारण 19वीं शताब्दी तक बर्फ का उत्पादन सर्दियों के दौरान दक्षिण में कम मात्रा में किया जाने लगा। उबले हुए ठंडे पानी से भरे छिद्रयुक्त मिट्टी के बर्तनों को 2-3 फीट चौड़ा और सिर्फ 8-10 इंच गहरे गड्ढे में पुआल के ऊपर रखा जाता था। सर्दियों की रातों में सतह पर पतली बर्फ जम जाती थी जिसे इकट्ठा करके बेचा जा सकता था।
भारत में कहां जमाई जाती थी बर्फ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुगली-चुचुरा और इलाहाबाद में बर्फ उत्पादन स्थल थे। 'हुगली बर्फ' कठोर क्रिस्टल के बजाय नरम कीचड़ जैसी दिखती थी इसलिए इसे खराब माना जाता था। भारत में ड्रिंक्स को ठंडा करने के लिए 'साल्टपीटर' और पानी को एक साथ मिलाया जाता था। वहीं, यूरोप में ड्रिंक्स को ठंडा करने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग किया जाता था मगर ये वास्तविक बर्फ बनाने में सक्षम नहीं थे।
1857 की क्रान्ति में बिगड़ा था बर्फ का कारोबार
बताया जाता है कि, अंग्रेजों के शासन काल में न्यू इंग्लैंड से भारत में बर्फ का निर्यात 1856 में चरम पर था। उस दौर में 146,000 टन (132 मिलियन किलोग्राम) बर्फ भेजी गई थी। मगर, 1857 के क्रान्ति में ये व्यापार लड़खड़ा गया। 1874 में चेन्नई (पूर्व में मद्रास) में इंटरनेशनल आइस कंपनी और 1878 में बंगाल आइस कंपनी की स्थापना हुई। कलकत्ता आइस एसोसिएशन के रूप में एक साथ काम करते हुए, उन्होंने तेजी से प्राकृतिक बर्फ को बाजार से बाहर कर दिया।

मुगल काल में बर्फ कैसे आती थी
कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि, भारत में मुगलों के शासनकाल के दौरान बर्फ एक लग्जरी चीज हुआ करती थी। उस दौर में हिमालय और कश्मीर से बर्फ को मंगाकर अंडरग्राउंड कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाता था। वहीं, बर्फ के अलग-अलग टुकड़ों को जूट के कपड़ों, लकड़ी के चूरे या बुरादे व ऊनी कंबंलों में लपेटकर ऊंटा और नाव से रसोई तक पहुंचाया जाता था। हालांकि, इतने काम में काफी लागत आती थी, यही वजह है कि मुगल काल में बर्फ एक लग्जरी चीज थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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