लंदन: ब्रिटेन की ‘ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप’ के कुछ सदस्यों ने अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा, ‘‘मैं अनुच्छेद 370 को हटाये जाने का पूर्ण रूप से समर्थन करता हूं...नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के घोषणापत्र के अनुरूप फिर से उचित और मजबूत नेतृत्व दिखाया है। अब समय है कि जम्मू और कश्मीर को भारतीय संविधान में समुचित ढंग से समाहित किया जाए।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडितों को वापसी के अधिकार की गारंटी दी जानी चाहिए और यह कदम किसी अन्य अल्पसंख्यक समूह को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने से रोकेगा।’’ ब्लैकमैन ने कहा, ‘‘घाटी में कृषि और सांस्कृतिक हस्तकला निर्यात, हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर और पर्यटन के विकास के लिए उत्कृष्ट अवसर हैं। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को आतंकवादियों से मुक्त कराना है क्योंकि सुरक्षा सर्वोपरि है।’’
वहीं ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने कहा कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से बात की है और राज्य को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बांटने के प्रस्ताव के संबंध में इस सप्ताह की शुरुआत में की गई घोषणा पर भारत के रुख पर स्पष्टीकरण प्राप्त किया। राब ने कहा,‘‘मेरी नियुक्ति के बाद से मैंने भारतीय विदेश मंत्री से दो बार बात की है और मैंने आज दिन में (बुधवार को) बात की।’’
उन्होंने कहा,‘‘हमने स्थिति पर अपनी कुछ चिंताएं व्यक्त की हैं और शांति की बात की है लेकिन भारत सरकार के दृष्टिकोण से भी स्थिति को समझा।’’ इससे पहले के बयान में विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय (एफसीओ) के एक प्रवक्ता ने कहा था ब्रिटेन स्थिति पर नजदीक से नजर रख रहा है और स्थिति को शांत रखने की मांग का समर्थन करता है।
वहीं विपक्षी लेबर पार्टी की सांसद और कश्मीर पर एपीपीजी की अध्यक्ष डेबी अब्राहम ने एफसीओ मंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘हम भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भारतीय संविधान के उस अनुच्छेद 370 पर की गई घोषणा को लेकर चिंतित हैं जिसे राष्ट्रपति के आदेश द्वारा हटा दिया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 को हटाने संबंधी भारत सरकार द्वारा लिया गया एकतरफा निर्णय जम्मू कश्मीर के लोगों के विश्वास के साथ धोखा है और उन्होंने चेताया कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन करता है।’’
अब्राहम ने ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त रूचि घनश्याम को भी एक पत्र जारी किया है और भारतीय सरकार की स्थिति पर चर्चा के लिए एक बैठक का आह्वान किया है। ब्रिटेन में कश्मीरी मूल के काफी लोग रहते हैं और इनमें से कई समूह भारत सरकार के कदम पर अपनी प्रतिक्रिया में इसी तरह से बंटे नजर आये।