पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज और बाहर ज्यादा न निकलने की अवस्था में गेमिंग में बच्चे अपना अधिक समय बिता रहे हैं और इन सारी चीजों का प्रभाव उनकी आंखों पर पड़ रहा है।
कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम के दौरान लगातार लैपटॉप के सामने घंटों बैठने से आंखों से जुड़ी लोगों को कई तरह की दिक्कतें होने लगी हैं। जानें क्या हैं वो आयुर्वेदिक नुस्खे जिससे आप आंखों की जलन और ड्राइनेस से निजात पा सकते हैं।
अक्सर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि जब भी वो आंख को मलते हैं तो पलकें टूटने लगती हैं। अगर आप इसी समस्या से जूझ रहे हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताएंगे जिन्हें खाने से पलकों के टूटने की समस्या तुरंत ठीक हो जाएगी।
मानसून के मौसम सें बच्चों की सेहत का अधिक ध्यान रखने की जरुरत होती है खासकर आंखो की। ऐसे में जानिए कुछ टिप्स जिससे आप रख सकते हैं बच्चों की आंखों को हमेशा हेल्दी।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति बहुत नजदीक होकर खांसता या छींकता है तो नाक और मुंह के साथ आंखों के जरिये भी संक्रमण शरीर में प्रवेश कर सकता है।
आप चाहते हैं कि आंखों की रोशनी कम ना हो और चश्मे को हमेशा के लिए बाय-बाय कहना चाहते हैं तो अपनाएं स्वामी रामदेव से जानिए घर पर कैसे बनाएं ये मैजिकल आई ड्राप।
लॉकडाउन में ज्यादातर लोग घर पर ही रहकर ऑफिस का काम कर रहे हैं। शिफ्ट टाइमिंग भी बढ़ा दी गई है जिससे लैपटॉप के सामने ज्यादा घंटे बिताने पड़ रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा बुरा असर आंखों पर पड़ रहा है। जानिए घर बैठे आंखों में बिना आई ड्रॉप डाले कैसे उसे आराम दें।
आंखों में सूखेपन की बीमारी का आसानी से पता लगाने और उसका इलाज करने के लिए शोधकर्ताओं ने नई 'नॉन इनवेसिव इमेजिंग टेकनीक’ विकसित की है।
आपकी खूबसूरती बढ़ाने वाला आईलाइनर कही आंखों की रोशनी तो नहीं छीन रहा है। इसे इस्तेमाल करने से पहले पढ़ें ये खबर।
टीओ रेटिना सोसाइटी ऑफ इंडिया (वीआरएसआई) ने रैजुमैब इंजेक्शन लगाने से देखने की शक्ति प्रभावित होने सहित अन्य दुष्प्रभावों के मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है और रोगियों की सुरक्षा पर ध्यान देने का आह्वान किया है। वीआरएसआई द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि रैजुमैब इंजेक्शन
आंखे शरीर के सबसे सेंसटीव पार्ट में से एक है। लेकिन ज्यादातर लड़कियां अपनी आंखों को सुंदर दिखाने के चक्कर में अपनी आंखों को कई तरह की नुकसान पहुंचाती है।
दूध की मदद से डार्क सर्कल की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है।
सर्दियों में आंखों का खास ख्याल रखना जरुरी होता है। कुछ तरीकों की मदद से आंखों की देखबाल की जा सकती है।
संक्रमण के कारण आंखों की रोशनी जाने के खतरे से अब बचा जा सकता है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी दवा विकसित की है जो आंखों की रोशनी बनाए रखने में मदद कर सकती है।
जुर्ग लोगों में शारीरिक क्षमता कम होने के साथ उम्र से जुड़े कई रोग भी घेर लेते हैं। इसमें सबसे गंभीर आंखों की बीमारियां है क्योंकि रेटिना की बीमारियों, जैसे उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) का समय पर इलाज न कराने से बुजुर्गों को अंधापन भी हो सकता है।
मानसून हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्से 'आंखों' में कुछ हानिकारक समस्याएं भी पैदा करता है। जानिए कैसे रखें अपनी आंखो का ख्याल।
कुरकुमिन (हल्दी का बॉयोएक्टिव घटक) का इस्तेमाल आई ड्रॉप के तौर पर करने रेटिना कोशिकाओं के नुकसान को कम करता है। रेटिना की कोशिकाओं का नुकसान ग्लूकोमा का शुरुआती लक्षण है।
वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि लगातार मनोवैज्ञानिक तनाव से आपके आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ सकता है। अध्ययन में पाया गया कि आपके चिकित्सक का व्यवहार और बीमारी को लेकर आपकी चिंता आपकी परेशानी और बढ़ा सकती है।
आंख की बिलनी यानी की पलकों पर होने वाले ऑयल ग्लैंड का एक इंफेक्शन होता है। जिसका मुख्य कारण गंदगी, मेकअप या बार-बार हाथ, तनाव, हार्मेन परिवर्तन आदि के कारण होता है। ये स्टैफिलोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है। जिसके कारण पलकों में सूजन सी आ जाती है। जो कि एक दाने की तरह दिखाई देता है।
देश में आंखों के कैंसर के कई मामलों के बारे में तब पता चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है। कई चिकित्सकों का मानना है कि इस प्रकार के रोग और उसके लक्षणों को लेकर लोगों को जागरूक करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, ताकि इसकी सही से रोकथाम, जानकारी और इलाज
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