जहां एक तरफ, पहले सभी सरकारी बैंक आईएमपीएस के लिए कोई फीस नहीं वसूलते थे जबकि दूसरी तरफ कुछ प्राइवेट बैंक पहले से ही आईएमपीएस के लिए चार्ज लेते थे।
एसबीआई आईएमपीएस के जरिये अगर आप नियमित रूप से ₹25,000 से अधिक की ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जानना जरूरी है। SBI का यह फैसला डिजिटल ट्रांजैक्शन को रेगुलेट करने की दिशा में एक और कदम है।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने बताया कि मेनटेनेंस का ये काम पहले से ही निर्धारित था। बैंक ने कहा है कि जिस समय सेवाएं बंद रहेंगे, उस दौरान यूपीआई के बजाय यूपीआई लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आईएमपीएस और यूपीआई इंस्टैंट और सेफ फंड ट्रांसफर के ये दो पॉपुलर ऑप्शन उपलब्ध हैं। ये दोनों बैंकिंग सर्विस काम तो एक ही करती हैं लेकिन इनके फीचर्स में विभिन्नता हैं।
IMPS के जरिए ट्रांसफर किया गया पैसा सामने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में तुरंत पहुंच जाता है। IMPS के जरिए चौबीसों घंटे, किसी भी जगह से किसी भी भारतीय बैंक खाते में इंस्टैंट मनी ट्रांसफर कर सकते हैं।
NEFT ट्रांजेक्शन आम तौर पर दो घंटे के भीतर सेटल हो जाते हैं। रिजर्व बैंक ने NEFT ट्रांजेक्शन पर कोई सीमा तय नहीं की है। हालांकि, अलग-अलग बैंक NEFT ट्रांसफर पर अपनी सीमाएं लगा सकते हैं।
New Rules from 1st February : एनपीएस, आईएमपीएस और फास्टैग सहित कई नियम आज से बदल गए हैं। पैसों से जुड़े इन नियमों में हुए बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डालेंगे।
31 अक्टूबर, 2023 के एनपीसीआई सर्कुलर में कहा गया है कि सभी सदस्यों से रिक्वेस्ट है कि वे इस पर ध्यान दें और 31 जनवरी 2024 तक सभी आईएमपीएस चैनलों पर मोबाइल नंबर + बैंक नाम के माध्यम से फंड ट्रांसफर शुरू करने और स्वीकार करने का अनुपालन करें।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 2023-24 श्रृंखला में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) की अंतिम किश्त जारी करेगा। यह आगामी अंक, जिसे SGB 2023-24 सीरीज IV के नाम से जाना जाता है, 12 फरवरी, 2024 को सदस्यता के लिए उपलब्ध होगा और 16 फरवरी, 2024 को बंद हो जाएगा।
IMPS यूजर्स को समय और स्थान की परवाह किए बिना, बैंकों के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की परमिशन देता है। हां, इसके लिए आपको मामूली चार्ज देने होते हैं।
क्या आप जानते हैं कि UPI के अलावा, पैसे भेजने के तीन और भी सुरक्षित तरीके होत हैं। इन्हें IMPS, NEFT और RTGS कहा जाता है। आइए आज आपको इन तीनों के बारे में बताते हैं।
दास ने कहा कि पर्याप्त तरलता को लेकर कोई भी चिंता नहीं है। आरबीआई वृद्धि का समर्थन करने के लिए पर्याप्त तरलता को बनाए रखना सुनिश्चित करेगा।
अगस्त का महीना आपके लिए खुशियां लेकर आ रहा है। जहां वाहन और प्रॉपर्टी खरीदना आपके लिए सस्ता हो जाएगा वहीं पैसे के लेन-देन से जुड़ी इस सर्विस में आपको अब कोई चार्ज नहीं देना होगा।
आरटीजीएस सिस्टम बड़ी राशि वाले फंड ट्रांसफर के लिए है, जबकि एनईएफटी सिस्टम का उपयोग 2 लाख रुपए तक की राशि के ट्रांसफर के लिए किया जाता है।
तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) से धन का लेन-देन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लगभग दोगुना बढ़कर 3.23 लाख करोड़ रुपए हो गया है। आईएमपीएस से भुगतान करने की हर बैंक की अपनी दैनिक और मासिक सीमा है।
पोस्ट ऑफिस में लगभग 34 करोड़ लोगों के खाते हैं और इस योजना के बाद सभी 34 करोड़ लोगों तक यह सुविधा पहुंच सकेगी
2016-17 में IMPS के जरिये 50 करोड़ लेन-देन किये गये थे। वृद्धि के ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में मोबाइल भुगतान की बेहतरीन संभावनाओं के संकेतक हैं
IMPS यानि इमिडिएट पेमेंट सर्विस के जरिए इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले ग्राहक 24 घंटे और सातो दिन कभी भी किसी भी समय पैसा ट्रांस्फर कर सकते हैं।
नवंबर 2016 में UPI के जरिए रोजाना सिर्फ 10 लाख ट्रांजेक्शन हो रहे थे जो मई 2017 में बढ़कर 3 करोड़ तक पहुंच गए हैं, IMPS ट्रांजेक्शन भी दोगुना हुआ है
SBIने NEFT और RTGS के शुल्क में 75 फीसदी की भारी कटौती की है। यह कटौती 2 दिन बाद यानि 15 जुलाई से लागू होगी।
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