यूपी के हापुड़ जिले में एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। अपराध की इस साजिश के बारे में सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। बीमा पॉलिसी की पैसे के लिए शख्स ने क्या क्या किया? जानें इस स्टोरी में...
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि लापरवाही या स्टंट के कारण मरने वाले ड्राइवर के परिवार को मुआवजा देने के लिए बीमा कंपनियां बाध्य नहीं होंगी। कोर्ट ने कहा कि जब हादसा ड्राइवर की गलती से हो, तो बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होती।
एलआईसी ने कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) के बदले, विमान दुर्घटना के कारण पॉलिसीधारक की मृत्यु के सरकारी रिकॉर्ड में कोई भी सबूत या केंद्र/राज्य सरकार/एयरलाइन अधिकारियों द्वारा पेमेंट किया गया कोई भी मुआवजा मृत्यु के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
शख्स ने पैसों के लालच में अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, हत्या को छिपाने के लिए उसने सड़क दुर्घटना की झूठी कहानी रची। लेकिन पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ ने सच्चाई सामने ला दी।
1.5 करोड़ रुपये बीमा की रकम को हासिल करने के लिए एक होटल व्यवसायी ने खुद को मरा हुआ दिखाने की शातिर चाल चली। हालांकि, पुलिस ने उसके मंसूबों को नाकाम कर दिया।
ज्यादातर पॉलिसी में पहले से चली आ रही बीमारियों की कवरेज के लिए कुछ सालों का वेटिंग पीरियड होता है। नियमों के अनुसार पुरानी बीमारियों को ज्यादा से ज्यादा 3 साल के लिए वेटिंग पीरियड में रखा जा सकता है।
सर्कुलर में कहा गया है कि दस्तावेजों के अभाव में कोई भी दावा अस्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रस्ताव की स्वीकृति के समय जरूरी दस्तावेजों को मांगना चाहिए।
रुपे डेबिट कार्ड अलग-अलग कवर कवरेज प्रदान करता है। इंश्योरेंस क्लेम, घटना के 90 दिनों के भीतर बीमाकर्ता को करना जरूरी है।
Health Insurance: इंश्योरेंस कंपनी से आप क्या एक साथ दो हेल्थ बीमा पर क्लेम ले सकते हैं। इसको लेकर नियमों के बारे में हम इस आर्टिकल में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
क्लेम रिजेक्ट होने पर आपके पास उपभोक्ता अदालत सहित कई प्लेटफॉर्म हैं जहां आप अपने सभी डॉक्यूमेंट्स के साथ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय अधिकतर लोग नियम और शर्तें पढ़ना भूल जाते हैं। अगर आप भी अपने परिवार में किसी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने वाले हैं तो इसमें सब लिमिट को चेक करना ना भूलें। यहां जानिए हेल्थ इंश्योरेंस में सब लिमिट क्या होता है और इसे चेक करना क्यों है जरूरी।
अगर पॉलिसी होल्डर के पास एक से ज्यादा पॉलिसी हैं तो सभी इंश्योरर पॉलिसी के तहत क्लेम को समान रूप से साझा कर सकते हैं।
पहले से हेल्थ इंश्योरेंस होने के बावजूद भी कुछ बीमारियां ऐसी है जिसके लिए अलग से पैसे देने होते हैं। इस से बचने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में अलग से क्रिटिकल इलनेस प्लान जोड़ते हैं। इसमें कई तरह की गंभीर बीमारियां कवर हो जाती को क्रिटिक हो। इनमें किडनी और स्ट्रोक की तरह लगभग 50 बीमारी शामिल हैं।
कोर्ट ने कहा कि जाहिर सी बात है कि जब ड्राइवर नशे की हालत में होता है तो उसका खुद कंट्रोल कम हो जाता है, जिससे वह गाड़ी चलाने के लिए अयोग्य हो जाता है।
Health Insurance की मांग बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। इसकी वजह है कि कोई गंभीर बीमारी होने पर हमारी वित्तीय प्लानिंग बिगड़ जाती है। आइए 5 प्वॉइंट में जानते हैं कि यह क्यों जरूरी है?
जॉब इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम आमतौर पर, कुल कवरेज का 3% से 5% तक होता है। अगर जॉब इंश्योरेंस होम लोन के तहत ली गई है तो अवधि पांच साल होगी।
बीमा उद्योग की कंपनियों का कहना है कि बीमा जोखिम से बचाव के लिए खरीदा जाता है चाहे उसके पीछे मानवीय गलती हो या कुछ और हो।
कंपनियों ने मार्च 2021 को समाप्त वित्त वर्ष में प्राकृतिक आपदाओं के कारण किए गए दावों में से केवल एक तिहाई यानी 761 करोड़ रुपये का ही निपटान किया।
गुजरात के अहमदाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां एक महिला ने अपने पति का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाया और उसके जरिए पति की 2 जीवन बीमा पॉलिसी क्लेम करके 2 बीमा कंपनियों को 18 लाख रुपए का चूना लगाया।
आप चाहें जितनी भी सावधानी बरतें, आप कभी न कभी अनचाही दुर्घटना के शिकार हो ही जाते हैं। ऐसी परिस्थिति से आपको बचाता है इंश्योरेंस।
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