म्यांमार और भारत की सीमा पर अस्थिरता बनी हुई है। म्यांमार में चल रहा आंदोलन राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रहा है। ऐसे में काफी संख्या में घुसपैठिये भारतीय सीमा में दाखिल होते हैं। इसके खिलाफ एनएसए अजीत डोभाल ने म्यांमार के पीएम से वार्ता की है।
लाओस में आज समुद्री सीमा विवाद और म्यांमार के संकट पर सबसे बड़ी बैठक होने जा रही है। इसमें भारत की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी से कई देश परेशान हैं। वहीं म्यांमार में गृहयुद्ध चल रहा है।
देश के नौजवानों को रोजगार का लालच देकर Fake Job Scam रैकेट में फंसाया गया। ये रैकेट म्यांमार से चलाया जा रहा है। फेक जॉब में फंसे युवाओं को भारत सरकार ने बड़ी संख्या में निकाला है।
म्यांमार के रखाइन हिंसा में रोहिंग्याओं के सिर कलम किए जाने का मामला सामने आने से यूएन भी हैरान है। संयुक्त राष्ट्र ने रखाइन हिंसा की कड़ी निंदा की है। साथ ही म्यांमार की सेना को इसके लिए सख्त चेतावनी भी दी है।
मिजोरम में लगातार म्यांमार से शरणार्थी आ रहे हैं और समस्या बनी हुई है। अब 36500 से ज्यादा शरणार्थियों ने मिजोरम में शरण ली है। मिजोरम के गृह विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पड़ोसी से देशों से भारत के राज्यों से बड़ी मात्रा में नशे की खेप आ रही है। हालांकि पुलिस लगातार इसके खिलाफ मुहिम चला रही है और नशे की खेप लाने वाले आरोपियों को पकड़ रही है। इसी कड़ी में मणिपुर पुलिस ने गुरुवार को कद्दू के अंदर छिपाकर रखी गई 3.5 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की।
म्यांमा में लोकतंत्र समर्थक समूहों ने राजधानी में कई जगहों को ड्रोन हमले से निशाना बनाया है। समूहों ने सेना के कई बेस पर भी हमले किए हैं। वर्ष 2021 से ही सेना ने जबरन तख्तापलट कर लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सां सू-की को जेल में डाल दिया था। तभी से सेना शासन कर रही है।
असम राइफल्स के जवानों ने मिजोरम के चंपई जिले में 9.6 करोड़ रुपये मूल्य की 1.3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की और मादक पदार्थ रखने के आरोप में म्यांमा के एक नागरिक को गिरफ्तार किया।
लालदुहोमा ने गुरुवार को विधानसभा को यह जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने पिछले साल अप्रैल में राज्य सरकार को म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थियों का बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने का निर्देश दिया था।
म्यांमार में सैन्य शासन जुंटा से जनता परेशान है। उनके एक ऐसे कदम से युवाओं में ऐसी दहशत फैल गई है कि वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
म्यांमार में सशस्त्र समूह और सेना के बीच छिड़े संघर्ष ने अब और अधिक व्यापक रूप ले लिया है। इससे म्यांमार की स्थिति नाजुक हो गई है। इससे म्यांमार की सीमा से लगे भारत और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी राष्ट्र भी चिंतित हो उठे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद ने बात की।
मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इससे विरोधी संघठनों में खलबली मच गई है। सरकार ने भारत-म्यांमार बॉर्डर के 1643 किलोमीटर खुले क्षेत्र को बाड़ लगाकर सील करने का फैसला किया है। ताकि घुसपैठियों को भारतीय सीमा में बेरोकटोक आने से रोका जा सके।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है। म्यांमार में रहने वाले भारतीयों के लिए जारी इस एडवाजइरी में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि म्यांमार के रखाइन प्रांत से भारतीय तुरंत बाहर निकलें, वहां रहना खतरनाक है।
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का ग्रामीणों ने विरोध किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाड़ लगाने से जमीन का एक बड़ा हिस्सा छूट जाएगा। इससे सीमा के पास रहने वाले ग्रामीण अपनी आजीविका के एकमात्र स्रोत से वंचित हो जाएंगे।
बता दें कि मिजोरम से भेजे गए इन सैनिकों को मिलाकर पिछले साल के नवंबर से लेकर अब तक म्यांमार सेना के कुल 635 जवानों को उनके देश वापस भेजा गया है।
मिजोरम के शीर्ष छात्र संगठन मिजो जिरलाई पावल (एमजेडपी) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भारत-म्यांमा सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवाजाही व्यवस्था (एफएमआर) को खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
बीते सप्ताह म्यांमार से कुल 184 सैनिक भागर मिजोरम पहुंच गए थे। सोमवार यानी 22 जनवरी को भारत ने इनमें से 184 सैनिकों को उनके देश वापस भेज दिया है।
मिजोरम में म्यांमार के 600 सैनिक घुस आए हैं, जिसे लेकर मिजोरम की सरकार ने केंद्र सरकार को सतर्क किया है और गुहार लगाई है कि इन्हें जल्द-से-जल्द वापस भेज दें। जवानों को फिलहाल असम राइफल्स कैंप में आश्रय दिया गया है।
मिजोरम की लालदुहोमा सरकार केंद्र के सहयोग से म्यांमा के शरणार्थियों और मणिपुर के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को मदद देना जारी रखेगी। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मीटिंग के बाद ये बात कही।
म्यांमार की सेना ने दुश्मनों के सामने हथियार डाल दिया है। म्यांमार की सरकार ने बताया है कि चीन सीमा से लगे उसके एक शहर पर दुश्मनों ने कब्जा कर लिया है। इसके बाद उसने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है।
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