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बिहार में कितनी हैं अति पिछड़ी जातियां? नीतीश की पसंद पर राहुल-तेजस्वी ने डाले डोरे, कर दिए हैं 10 वादे

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द ही हो सकता है, इससे पहले महागठबंधन ने अति पिछड़ा कार्ड खेल दिया है। जानें बिहार में अति पिछड़ी कितनी जातियां हैं और राहुल तेजस्वी ने उनके लिए क्या वादे किए हैं?

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Sep 24, 2025 08:26 pm IST, Updated : Sep 24, 2025 11:25 pm IST
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव- India TV Hindi
Image Source : PTI राहुल गांधी और तेजस्वी यादव

पटना: महागठबंधन ने बुधवार को नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) कार्ड खेल दिया है और अति पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण पर केंद्रित 10 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा कर दी है जिसकी काट एनडीए को भी तलाश करनी होगी। इस मेनिफेस्टो को अति पिछड़ा न्याय संकल्प नाम दिया गया है। इसमें वादा किया गया है कि अगर कांग्रेस राजद के नेतृत्व वाले बिहार गठबंधन के साथ मिलकर इंडिया ब्लॉक के तहत सरकार बनाती है, तो इस मेनिफेस्टो में किए गए वादे तुरंत पूरे किए जाएंगे। सबसे पहले तो जान लेते हैं क्या है महागठबंधन के इस संकल्प पत्र में....

अति पिछड़ा न्याय संकल्प

  1.  'अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम' पारित किया जाएगा।

     

  2. अतिपिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण को बढ़ाकर 30% किया जाएगा।
     
  3.  आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50% की सीमा को बढ़ाने हेतु, विधान मंडल पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
     
  4.  नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में "Not Found Suitable" (NFS) जैसी अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा।
     
  5. अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (under- or over-inclusion) से संबंधित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा।
     
  6. अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जन-जाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्रों में 3 डेसिमल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डेसिमल आवासीय भूमि उपलब्ध करायी जाएगी।
     
  7. UPA सरकार द्वारा पारित 'शिक्षा अधिकार अधिनियम' (2010) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन हेतु आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अतिपिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जन-जाति के बच्चों हेतु निर्धारित किया जाएगा।
     
  8. 25 करोड़ रुपयों तक के सरकारी ठेकों/आपूर्ति कार्यों में अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।
     
  9. संविधान की धारा 15 (5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन हेतु आरक्षण लागू किया जाएगा।
     
  10. आरक्षण की देखरेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, और जातियों की आरक्षण सूची में कोई भी परिवर्तन केवल विधान मंडल की अनुमति से ही संभव होगा।

महागठबंधन के नेता

Image Source : PTI
महागठबंधन के नेता


अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण

बिहार में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को लेकर सियासत होती रही है। एक बार फिर से चुनाव से  पहले महागठबंधन ने अति पिछड़ा कार्ड खेल दिया है जिसकी तुलना कर्पूरी ठाकुर की नीतियों से की जा रही है। बता दें कि बिहारे के पूर्व मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर ने साल 1977-79 में पिछड़ों और गरीब सवर्णों के लिए पहली बार आरक्षण और कल्याण योजनाएं लागू की थीं, जिसके बाद अति पिछड़ों के लिए 26% आरक्षण लागू किया गया था। इसकी सबसे बड़ी बात ये थी कि इसमें गरीब सवर्ण (EWS) को भी 3% आरक्षण दिया गया था। कर्पूरी ठाकुर की याद दिलाकर, महागठबंधन अपने सामाजिक न्याय एजेंडा को मजबूत कर रहा है।

राहुल-तेजस्वी और खरगे

Image Source : PTI
राहुल-तेजस्वी और खरगे


बिहार में ईबीसी के पसंद रहे हैं नीतीश

बिहार में 36% की आबादी के साथ अति पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा समूह है, जिसके वोटर पारंपरिक रूप से नीतीश कुमार को वोट देते हैं। अति पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए नीतीश कुमार ने कई तरह के प्रयास किए और इस वर्ग ने नीतीश को सत्ता दिलाने में सहयोग किया। नीतीश ने इस वर्ग के लिए 2005 में सरकार बनने के बाद पंचायती राज में 20% आरक्षण दिया। इसके बाद नगरीय निकाय चुनाव में भी इसे लागू किया। बता दें कि बिहार ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी

Image Source : PTI
कांग्रेस नेता राहुल गांधी

बिहार में कितनी हैं ईबीसी जातियां

राज्य के 2023 के जाति सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी 36% है और इसमें कुल 112 जातियां शामिल हैं। 

ईबीसी में केवल चार जातियां तेली, मलाह, कानू और धनुक हैं, जिनकी आबादी 2% से ज्यादा हैं।

 मुस्लिम जातियों में जुलाहा ही महत्वपूर्ण है, जिसकी आबादी 3.5% के आसपास है।

 बाकी 100 जातियों का हिस्सा 1% से भी कम है।

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