संसद में एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल उठे। प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया, एक बार फिर नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया, पर बीजेपी की तरफ से निशिकांत दुबे ने राहुल को करारा जवाब दिया। उनके एक-एक आरोप की हवा निकाल दी। राहुल गांधी पूरी तैयारी के साथ आए थे। संसद में टी-शर्ट के बजाय खादी का कुर्ता पायजामा पहनकर पहुंचे। पहले खादी पर एक लंबा लैक्चर दिया, फिर अपने सारे पुराने आरोप दोहराए। लेकिन एक भी नई बात नहीं कही। सारे आरोप पुराने थे।
राहुल ने कहा कि सरकार हर संस्था पर कब्जा कर रही है। ED, CBI, इनकम टैक्स, हर जगह RSS के लोगों को बैठाया जा रहा है। चुनाव आयोग पर भी सरकार का कब्जा हो गया है, इसीलिए चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाया गया। राहुल ने कहा अब सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट चोरी कर रही है, वोट चोरी की मदद से चुनाव जीत रही है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने तो EVM को हटाकर बैलट से वोटिंग कराने की मांग की लेकिन जब निशिकांत दुबे ने जवाब दिया तो कांग्रेस के नेताओं के पास एक दूसरे का चेहरा ताकने के सिवा कोई चारा नहीं था।
निशिकांत ने पूरे तथ्यों के साथ, पूरे आत्मविश्वास के साथ ज़ोरदार तरीके से राहुल गांधी के आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया। चूंकि राहुल गांधी ने संवैधानिक संस्थाओं पर क़ब्ज़े का इल्ज़ाम लगाया था तो निशिकांत दुबे ने कांग्रेस का पूरा इतिहास सबके सामने रख दिया। सदन को बताया कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को कैसे रबर स्टैंप बना दिया था, कैसे न्यायपालिका की आजादी को खत्म किया था, कैसे सोनिया और राहुल के सुरक्षा अधिकारी को CBI निदेशक बना दिया, कांग्रेस के किस वर्कर को 10 साल तक UPSC का चैयरमैन बनाकर रखा। निशिकांत दुबे ने कहा कि लिस्ट तो बहुत लंबी है, पूरी गिनाएंगे तो कांग्रेसियों को मुंह छुपाने की जगह नहीं मिलेगी।
चूंकि राहुल गांधी ने बीजेपी पर चुनाव आयोग की मदद से चुनाव जीतने का इल्जाम लगाया, तो निशिकांत दुबे ने ये भी गिना दिया कि आजादी के बाद 64 साल के राज में कांग्रेस ने किस किसको चुनाव आयुक्त बनाया और उनसे फायदा लेने के बाद उन्हें इनाम में क्या दिया। बहस के पहले दिन विपक्ष के ज्यादातर नेताओं ने EVM पर सवाल उठाए, SIR को रोकने की मांग की। राहुल गांधी ने मांग की कि विपक्षी दलों को EVM का access दिया जाए, विपक्ष को ये जानने का हक है कि EVM में कौन सा सॉफ्टवेयर है, EVM कैसे काम करती है। राहुल ने कहा कि विपक्षी दलों को machine readable वोटर लिस्ट दी जाए, चुनाव आयुक्तों को immunity देने वाला क़ानून वापस हो, तभी चुनावों पर लोगों कै भरोसा कायम होगा।
निशिकांत दुबे ने संसद की पुरानी रिपोर्ट्स को दिखाते हुए बताया कि 1961 और 1971 में संसदीय समितियों ने वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न कराने और EVM से चुनाव कराने की सिफ़ारिश की थी। कांग्रेस ने SIR पर बहस की मांग बड़े ज़ोर-शोर से की थी, लगा था राहुल गांधी के पास काफी मसाला होगा, पर उन्होंने कोई नई बात नहीं बताई। जो कुछ कहा, निशिकांत दुबे ने उसके धागे खोल दिए। बीजेपी ने निशिकांत को राहुल के तुरंत बाद बोलने के लिए तैयार रखा था। तीर निशाने पर लगा। राहुल ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर लिया है। निशिकांत ने गिनवा दिया कि कांग्रेस ने टी. एन. शेषन से लेकर एम. एस. गिल तक कैसे अपने लोगों को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया।
राहुल ने इल्जाम लगाया था कि बीजेपी CBI, ED का इस्तेमाल करती है। निशिकांत ने गिनवा दिया कि कांग्रेस ने कैसे कैसे लोगों को CBI और ED में appoint किया था। अखिलेश यादव भी cross fire में आ गए। उन्होंने बैलट से चुनाव की बात कह दी। निशिकांत ने याद दिलाया कि जब बैलेट था तो कैसे बूथ और बैलट लूटे जाते थे। मैंने वो ज़माना देखा है जब तकरीबन हर चुनाव में बूथ लूटे जाते थे, बार-बार चुनाव रद्द होते थे, पुनर्मतदान होते थे, बूथ लूटने के लिए बाहुबलियों का इस्तेमाल किया जाता था, चुनाव के दौरान जम कर खून खराबा होता था। जिन लोगों ने वो दिन देखे हैं, वे सहमत होंगे कि अब बहुत कुछ बदल गया है। वैसे भी अब तो हर आदमी के हाथ में मोबाइल है। किसी के लिए भी चुनाव में बेइमानी करना असंभव है। इसीलिए जब वोट चोरी जैसे आरोप लगते हैं तो ज्यादातर लोग उन पर यक़ीन नहीं करते। (रजत शर्मा)
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