पुराने नियम के तहत, चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) 2 दिनों के साइकल में चेक की प्रोसेसिंग करता था। सीटीएस चेक क्लियरेंस का एक इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस है।
अभी सोसल मीडिया पर एक चेक की फोटो खूब वायरल हो रही है जिसे एक प्रिंसिपल ने बनाया है। आप जब उस चेक पर लिखे अमाउंट की स्पेलिंग देखेंगे तो खुद कहेंगे इसे प्रिंसिपल किसने बना दिया।
आरबीआई की यह पहल न केवल चेक क्लियरिंग प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि ग्राहकों को भी तेज सेवा का अनुभव होगा। यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रगति है।
बैंक लगातार चेक बाउंस मामलों को लेकर सावधान रहते हैं। सिबिल स्कोर के कमजोर होने से बैंक यह मान लेता है कि आप समय पर EMI चुकाने में असमर्थ हो सकते हैं।
शक्तिकांत दास ने बताया कि रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। बताते चलें कि आरबीआई ने लगातार 9वीं बार रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है और इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है।
आरबीआई एक जल्द चेक क्लियरेंस के लिए एक नया सिस्टम बना रहा है। इस नए सिस्टम के तहत आपका चेक कुछ ही घंटों में क्लियर हो जाएगा।
बैंक ऑफ इंडिया के एक ब्रांच में एक शख्स ने 5 लाख रुपये का चेक जमा किया था, लेकिन जब 2 दिन बाद भी उसके अकाउंट में पैसे नहीं पहुंचे तो उसके होश उड़ गए।
विशाखापत्तनम में सिंहाचलम पहाड़ी पर स्थित श्री वराहलक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के अधिकारी उस वक्त हैरान रह गए जब उन्होंने हुंडी में 100 करोड़ रुपये का चेक पड़ा देखा।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने ग्राहकों को चेक के फर्जी भुगतान से बचाने के लिए यह कदम उठाया। पीएनबी ने एक बयान में कहा कि यह फैसला पांच अप्रैल, 2023 से लागू होगा।
हालात यह हैं कि इस आदेश को लागू करते समय यह भी नहीं सोचा गया कि पाकिस्तान में डिजिटल पेमेंट का इंफ्स्ट्रक्चर खस्ता हाल में है।
पॉजिटिव पे सिस्टम के जरिए चेक से 50 हजार रुपये से अधिक के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए चेक जारी करने वाले को चेक के साथ साथ अलग से भी जानकारियां बैंक को देनी होगी। सिस्टम में जानकारी और चेक की जानकारी का मिलान होने पर ही भुगतान होगा
मूल्य के हिसाब से चेक द्वारा भुगतान 20.08 प्रतिशत रहा। 2015-16 में चेक के जरिये भुगतान का मात्रा के हिसाब से 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत हिस्सा था।
आरबीआई ने बैंक धोखाधड़ी रोकने के लिये एक जनवरी 2021 से चेक के लिये ‘सकारात्मक भुगतान व्यवस्था’ शुरू करने का निर्णय किया है।
आरबीआई ने 2010 में इस सिस्टम को पेश किया था। वर्तमान में, कुछ प्रमुख शहरों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
वित्तीय लेन-देन के माध्यम के रूप में चेक की विश्वसनीयता बढ़ाने और चेक-बाउंस मामलों से प्रभावित छोटी और मझोली इकाइयों की मदद के लिए सरकार ने मौजूदा नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट-1881 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।
यदि आप भी लेनदेन के लिए चैक का प्रयोग करते हैं तो यह खबर आपको मुश्किल में डाल सकती है। सरकार चैक की व्यवस्था को समाप्त करने पर विचार कर रही है।
आज हम आपको बताएंगे कि म्यूचुअल फंड के यूनिटों को भुनाकर आप अपने पैसे कैसे निकाल सकते हैं। तरीका आसान है, मुश्किल नहीं।
5 पैसे जमा करने पर मैसूर के रहने वाले एस सतीश को SBI ने 25 हजार रुपए दिए। यह सुनने में जरूर आपको अजीब लगा रहा होगा, लेकिन यह सच है।
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