किसी प्रोजेक्ट के लिए, डेवलपर्स को एनएचएआई, एएआई, अग्निशमन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि जैसे विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्राधिकरणों से कई अनापत्ति प्रमाण पत्र/अनुमोदन/अनुमति लेने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मांग है।
डीएलएफ समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अशोक त्यागी ने शनिवार को कहा था कि इस विशिष्ट पेशकश के लिए काफी मजबूत मांग देखने को मिल रही है। मार्केट कैप के लिहाज से डीएलएफ देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी है।
रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले 4 सालों में जबरदस्त तेजी रही है। इसके चलते प्रॉपर्टी की कीमत में बड़ा उछाल आय है। हालांकि, 2025 में इसमें थोड़ी सुस्ती दिखेगी। प्रॉपर्टी की मांग बनी रहेगी लेकिन कीमत में बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।
प्रत्येक आवासीय इकाई से औसतन 70 करोड़ रुपये मिले। डीएलएफ चरण पांच में 17 एकड़ की आवासीय परियोजना 'द डहलियाज' पेश की थी। इसमें 420 अपार्टमेंट और पेंटहाउस हैं।
स्क्वायर यार्ड्स ने बताया कि अक्षय कुमार ने ये प्रॉपर्टी नवंबर 2017 में 2.38 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जिसे 78 प्रतिशत के जबरदस्त प्रॉफिट के साथ 4.25 करोड़ रुपये में बेचा गया है। इस अपार्टमेंट का कारपेट एरिया 1073 वर्ग फुट है। इस फ्लैट के साथ दो कार के पार्किंग स्पेस भी है।
देश के कई राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी की दरें अधिक हैं। भारत में घर खरीदने वालों के लिए यह एक बड़ा वित्तीय बोझ हैं। इसे तर्कसंगत बनाने पर जोर देना चाहिए।
एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल आवास बिक्री छह प्रतिशत घटकर 61,900 इकाई रह गई, जो 2023 में 65,625 इकाई थी
घरों की मांग लगातार कम हो रही है। इसकी वजह प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत है। एंड यूजर्स चाह कर भी आशियान खरीद नहीं पा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में घर लेने वाली की संख्या वर्ष 2025 में बढ़कर 72 प्रतिशत तक होने की आशा है जो 2020 में केवल 65 प्रतिशत थी। यह डाटा रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अगले 5 वर्ष तक शहरीकरण के बढ़ते ग्राफ और इसके कारण घर लेने वालों की संख्या बढ़ने की ओर इशारा कर रहा है।
भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर्स संघों के परिसंघ (क्रेडाई) ने किफायती घर बनाने के लिए रियल एस्टेट कंपनियों को टैक्स में छूट और ग्राहकों द्वारा होम लोन पर चुकाए जाने वाले मूलधन और ब्याज की कटौती सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है।
रियल एस्टेट कंसल्टेंट का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी और मुद्रास्फीति के उच्च स्तर के चलते 2025 चुनौतीपूर्ण होने की उम्मीद है। साल 2024 में आवास क्षेत्र में निवेश पिछले वर्ष की तुलना में 171 प्रतिशत बढ़ा।
2024 में प्रीमियम प्रॉपर्टी की मांग जबरदस्त रही। वहीं, मिड और लोअर मिड सेगमेंट के लिए सप्लाई में कमी एक बड़ी चिंता बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में इस असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।
नए साल शुरू होने के साथ प्रॉपर्टी बाजार में हलचल तेज हो गई है। इस बार बजट में भी रियल एस्टेट को लेकर कई बड़े ऐलान होने की उम्मीद है।
बीते साल एक शीर्ष कार्यकारी द्वारा डीएलएफ कैमेलियास में 16,290 वर्ग फुट के पेंटहाउस को ₹190 करोड़ में खरीदा। यह आश्चर्यजनक रूप से ₹1,80,000 प्रति वर्ग फुट के बराबर है।
भारतीय आवास बाजार में 2-5 करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की मजबूत मांग देखी गई। हैदराबाद और पुणे ने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ और मुंबई ने 13 साल का शिखर दर्ज किया।
भारत में 2024 में घरों की बिक्री में कोरोना के बाद पहली बार गिरावट आई। घरों की कीमत बढ़ने से मांग घटी है। इसके चलते इस बार रियल एस्टेट सेक्टर बजट से काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं।
स्क्वायर यार्ड्स का कहना है कि भारतीय आवासीय अचल संपत्ति बाजार ने महामारी के बाद एक आशाजनक उछाल में प्रवेश किया है, जो कि दबी हुई मांग और गृहस्वामी के लिए मजबूत भावना से प्रेरित है।
आम आदमी के लिए घर का सपना पूरा करना मुश्किल होते जा रहा है। दरअसल, प्रॉपर्टी कीमत कमाई के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।
रियल एस्टेट कंपनी ने कहा कि उसने 2024-25 के पहले नौ महीनों में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बुकिंग वैल्यू हासिल कर ली है। यह प्रदर्शन कंपनी के 4,800-5,200 करोड़ रुपये के पूरे साल के मार्गदर्शन के भीतर है।
मुंबई मेट्रो रीजन 2024 में लगभग 1,55,335 इकाइयों की बिक्री के साथ सबसे अधिक बिक्री देखी गई। बेंगलुरू में भी आवास बिक्री में 2% की मामूली वार्षिक वृद्धि देखी गई। वहीं, NCR 2024 में में घरों की बिक्री घटकर 61,900 रहने का अनुमान है।
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