Interesting Facts : दुनिया भर के देशों में भारत अकेला ऐसा देश है जो कि विविधता में एकता के सूत्र को आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है। भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें आपको विविधता देखने को मिल जाएगी। अगर अकेले भारतीय शहरों की बात करें तों आपको शहरों के नाम से लेकर उनकी खूबियों तक में कई ऐसी चीजें मिलेंगी जो देखने सुनने में काफी अलग होती हैं। जैसे कि आपने 'सिविल लाइन्स' नाम की जगह सुनी होगी। प्रयागराज, कानपुर, रुड़की, दिल्ली, बरेली और फतेहपुर जैसे शहरों में सिविल लाइंस मौजूद हैं। इस जगह के बारे में न केवल इसका नाम आपने सुना होगा बल्कि आप कई इस जगह गए भी होंग। कभी आपने सोचा है कि, आखिर भारत के शहरों में 'सिविल लाइन्स' क्यों बने होते हैं ? इसका कॉन्सेप्ट किसका था मुगल या अंग्रेज ? इन सवालों का जवाब आज हम आपको देने वाले हैं।
सिविल लाइन्स का महत्व
अगर आपके शहर में भी सिविल लाइन्स नामक जगह है तो आपको पता होगा कि ये इलाका आपके शहर का पॉश इलाका है। हर शहर में सिविल लाइन्स अपने पुराने और लग्जरी बंगलों, चौड़ी सड़कों और हरियाली के काफी फेमस हैं और ऐतिहासिक महत्व भी रखते हैं। आपको पता होगा कि, कई बंगले वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सिविल लाइन्स में ही आवंटित किए जाते हैं। बता दें कि, इन इलाकों में अब भी ब्रिटिश काल की कुछ झलक देखने को मिलती है।
मुगल या अंग्रेज किसका आइडिया
मुगल और अंग्रेज दोनों ने भारत पर लंबे समय तक हुकूमत की, दोनों में भारतीय की संस्कृति और यहां ये सामाजिक ताने—बाने को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया। मुगलों और अंग्रेजों दोनों ने समान तौर पर भारत की पहचान को मिटाने का कुत्सित प्रयास कर अपनी संस्कृति को थोपने का काम किया। हालांकि, उस दौर में कुछ इमारतें और भवन ऐसे भी थे जो कि जिनकी वास्तुकला आज लोगों को काफी पसंद आती है। उस दौर में इमारतों के अलावा कुछ मोहल्ले भी ऐसे बनाए गए जहां उसे बसाने वालों की झलक मिल सके। सिविल लाइन्स इसी की एक बानगी है जिसे अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान बनाया।

सिविल लाइन्स क्यों बनाए गए
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिविल लाइन्स का आइडिया 1800 के दशक का है जब अंग्रेज भारत पर शासन कर अपने नियंत्रण को और मजबूत कराने में लगे थे। अंग्रेजों की नस्लभेद और भेदभावयुक्त विचारधारा का ही परिणाम है जिसने अंग्रेजों को अपने अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के लिए एक अलग क्षेत्र बनाने के प्रेरित किया। भारतीय और अंग्रेजों के बीच दूरी बनी रहे इसलिए उन्होंने एक अलग क्षेत्र बनाया, जहां भारतीयों को जाने की अनुमति नहीं थी।
सिविल लाइन्स में क्या-क्या था
रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जाता है कि, सिविल लाइन्स में बड़े-बड़े बंगले और नाच-गाने व मनोरंजन के लिए खास क्लब थे। इसे शहर का सबसे महंगा और संभ्रांत इलाका माना जाता था। 'व्हाइट टाउन' के नाम से मशहूर यह इलाका सिर्फ गोरे निवासियों के लिए ही बना था। 'सिविल लाइन्स' शब्द इसी अलगाव से निकला है, क्योंकि इसे सरकारी अधिकारियों को बाकी नागरिकों से अलग रखने के लिए बनाया गया था। आज इनमें से कई बंगले वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को आवंटित हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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