Thursday, January 15, 2026
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I-PAC रेड मामले में ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर लगी रोक, हाई कोर्ट में सुनवाई क्यों नहीं? जांच एजेंसी ने बताई वजह

IPAC रेड मामले में ED के अधिकारियों के खिलाफ बंगाल पुलिस फिलहाल कोई कानूनी एक्शन नहीं ले सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है।

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Mangal Yadav Published : Jan 15, 2026 03:26 pm IST, Updated : Jan 15, 2026 03:51 pm IST
सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
Image Source : ANI सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्लीः IPAC रेड मामले में ईडी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को हम नोटिस जारी कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज समेत सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने सीएम ममता बनर्जी,बंगाल के डीजीपी,पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता कमिश्नर को नोटिस जारी किया है।

हाई कोर्ट में हंगामा कराना चाहती थी टीएमसीः ईडी

 ईडी ने कोर्ट को यह भी बताया कि उसने मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन जब सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध होना था, तब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की लीगल सेल द्वारा व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर लोगों से अदालत में इकट्ठा होने को कहा गया। ED ने कोर्ट में इस दावे के दिए सबूत। ED ने व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट सुप्रीम कोर्ट में दिया है। व्हाट्सएप से मैसेज करने का मकसद सुनवाई के दौरान लोगों को इक्कठा कर हंगामा खड़ा करने का था ताकि हाईकोर्ट में ED की याचिका पर सुनवाई टल जाए। लीगल माइंड के नाम से एक ग्रुप बनाया गया था जिसमें मेसेज शेयर किया गया।

ईडी ने कोर्ट में दी ये दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने SG की दलीलें आदेश में रिकॉर्ड की। कोर्ट में ईडी ने दलील दी कि वह वर्ष 2020 से एक घोटाले की जांच कर रही है। जांच के दौरान खुफिया जानकारी मिली थी कि 20 करोड़ रुपये की अपराध की आय (POC) आर. कांतिलाल की फर्म को ट्रांसफर की गई, जिसे आगे आई-पैक (IPAC) फ्रेमवर्क के तहत उसके काम को अंजाम देने वाले लोगों को दिया गया।

ईडी की ओर से कहा गया कि जब अधिकारी संबंधित परिसर में तलाशी ले रहे थे। उसी दौरान कोलकाता के आईपीएस डिप्टी पुलिस कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर वहां पहुंचे। इसके बाद, जांच में हस्तक्षेप न करने के स्पष्ट अनुरोध के बावजूद, स्वयं मुख्यमंत्री भी परिसर में दाखिल हो गईं, जबकि यह तलाशी पीएमएलए के तहत की जा रही थी। 

ईडी ने लगाया ये आरोप

ईडी ने कोर्ट को बताया कि यह कोई एक घटना नहीं है। इससे पहले भी जब सीबीआई किसी मामले की जांच कर रही थी, तब इसी तरह की घटना हुई थी। एजेंसी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच में हस्तक्षेप का एक पैटर्न अपनाया जा रहा है। यह भी दलील दी गई कि ईडी द्वारा एकत्र की गई सामग्री को अवैध तरीके से उठा लिया गया और इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी नोट किया कि SG के मुताबिक इतने बड़े घोटालों से जुड़े मामलों में केंद्रीय एजेंसियों के लिए जांच जारी रखना बेहद कठिन हो जाता है।  

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